भारत में नए साल पर हरे अंगूरों का अनोखा ट्रेंड
नए साल पर हरे अंगूरों की मांग में उछाल
नई दिल्ली: इस नए साल पर भारत में एक अनोखा ट्रेंड देखने को मिला, जो 12 हरे अंगूरों के इर्द-गिर्द घूमता है। नए साल की रात एक स्पेनिश परंपरा ने अचानक भारत में लोकप्रियता हासिल कर ली, जिसके चलते स्थानीय बाजारों और ऑनलाइन ग्रोसरी ऐप्स में हरे अंगूरों की भारी कमी हो गई। कई लोग देर रात तक बाजारों में खोजते रहे, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा, क्योंकि अंगूर दुकानों से गायब हो चुके थे।
स्पेनिश परंपरा का प्रभाव
यह वायरल ट्रेंड एक स्पेनिश रस्म पर आधारित है, जिसे Las Doce Uvas de la Suerte कहा जाता है, जिसका अर्थ है भाग्य के 12 अंगूर। इस परंपरा के अनुसार, नए साल की रात ठीक 12 बजे हर घंटे की घड़ी की आवाज के साथ एक अंगूर खाने से आने वाले साल के सभी 12 महीनों के लिए भाग्य, सफलता और खुशी प्राप्त होती है। सोशल मीडिया के प्रभाव से, यह परंपरा अब भारतीय घरों में, खासकर युवाओं के बीच फैल गई है।
दुकानदार की कहानी
एक वायरल वीडियो में एक दुकानदार ने बताया कि कैसे अचानक हरे अंगूरों की मांग बढ़ गई। उसने कहा कि 200 से 300 ग्राहक अंगूर खरीदे बिना लौट गए, क्योंकि स्टॉक खत्म हो गया था। दिलचस्प बात यह है कि लोग केवल हरे अंगूर मांग रहे थे, जबकि लाल या काले अंगूरों को मना कर दिया गया था, क्योंकि कई का मानना था कि यह रस्म सिर्फ हरे अंगूरों के साथ ही सफल होती है।
ट्रेंड का विस्तार
क्या है मान्यता?
इस ट्रेंड में एक और दिलचस्प मोड़ आया, जब सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि आधी रात के बाद एक मेज के नीचे बैठकर 12 अंगूर खाने से भाग्य और भी बढ़ता है। यह अजीब विचार इंस्टाग्राम और रील्स पर तेजी से फैल गया, जिससे मांग में और वृद्धि हुई।
लोगों की प्रतिक्रियाएं
वीडियो पर लोगों ने किया रिएक्ट
इस वीडियो को 2.6 मिलियन से अधिक बार देखा गया है और कमेंट सेक्शन में ऐसे अनुभवों से भरे हुए हैं। एक यूजर ने लिखा कि उनके पिता ने कई बाजारों में अंगूर खोजे। दूसरे ने कहा कि उनके पास काले अंगूरों का ही विकल्प था। एक क्रिएटिव यूजर ने इसे एक बिजनेस आइडिया में बदलने का सुझाव दिया, जिसमें नए साल के लिए 12 अंगूरों के पैक बेचे जाएं।
परंपरा की उत्पत्ति
कैसे शुरू हुई यह परंपरा?
एक रिपोर्ट के अनुसार, यह परंपरा 1909 में मैड्रिड, स्पेन में शुरू हुई थी, जब अंगूर के किसानों ने अधिक उपज बेचने के लिए इस रस्म को अपनाया। समय के साथ, यह नए साल का प्रतीक बन गया और अब यह भारत में अंगूरों की अप्रत्याशित कमी का कारण बन गया है। यह स्पष्ट है कि सोशल मीडिया ने रातों-रात अंगूरों को भी सोने जैसा बना दिया है।
