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रणथंभौर में बाघ की घेराबंदी: पर्यटकों की लापरवाही पर उठे सवाल

रणथंभौर नेशनल पार्क में एक वायरल वीडियो में बाघ को सफारी जीपों से घिरा हुआ दिखाया गया है, जिससे जानवरों के लिए खतरनाक स्थिति उत्पन्न हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं जानवरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं, जिसमें पर्यटकों की लापरवाही और सफारी प्रबंधन पर सवाल उठाए गए हैं। जानें इस मामले में विशेषज्ञों की राय और क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
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रणथंभौर में बाघ की घेराबंदी: पर्यटकों की लापरवाही पर उठे सवाल

रणथंभौर नेशनल पार्क में बाघ की घेराबंदी


रणथंभौर नेशनल पार्क से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है, जिसमें एक बाघ सफारी जीपों से चारों ओर घिरा हुआ दिखाई दे रहा है। इस क्लिप में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि कई गाड़ियां बाघ के रास्ते में खड़ी हैं, जिससे उसे आगे बढ़ने के लिए जगह नहीं मिल रही है। इस दौरान पर्यटक फोटो और वीडियो लेने में व्यस्त हैं, जबकि बाघ तनाव में नजर आ रहा है।


जानवरों के लिए खतरनाक स्थिति

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति जानवरों के लिए अत्यंत खतरनाक हो सकती है। जब जंगली जानवर को इस तरह से घेर लिया जाता है, तो उसके शरीर में तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है। इससे बाघ आक्रामक हो सकता है और अपनी सुरक्षा के लिए हमला भी कर सकता है, जो न केवल जानवरों के लिए बल्कि पर्यटकों के लिए भी जोखिम भरा हो सकता है।


सोशल मीडिया पर गुस्सा

इस वीडियो को लाखों लोगों ने देखा है और हजारों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कई यूजर्स ने इसे शर्मनाक बताया और कहा कि बाघ इंसानों की भीड़ में अधिक शांत और समझदार लग रहा है। कुछ लोगों ने सफारी प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे बाघ अपने ही घर में ट्रैफिक जाम में फंस गया हो। वहीं, कुछ यूजर्स ने मोबाइल और कैमरे के अत्यधिक उपयोग पर भी नाराजगी व्यक्त की।



विशेषज्ञों की राय

इस प्रकार की घटनाओं पर पहले भी चिंता व्यक्त की जा चुकी है। वन अधिकारियों के अनुसार, सफारी के दौरान अधिक भीड़ और अनुशासन की कमी जानवरों की स्वाभाविक गतिविधियों में बाधा डालती है। इससे उनके स्वास्थ्य और प्रजनन पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं की गई, तो वन्यजीव संरक्षण पर गंभीर असर पड़ सकता है।