अमेरिका का इराक में चुनावों पर ध्यान: ट्रंप का अली जैदी को समर्थन
अमेरिका की नजरें इराक पर
अमेरिका मिडिल ईस्ट के देशों पर अपनी नजरें गड़ाए हुए है। ईरान पर हमले और कई मोर्चों पर घेराबंदी के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की निगाहें अब इराक की ओर हैं। इराक में प्रधानमंत्री पद के चुनाव होने वाले हैं, जिसमें प्रमुख उद्योगपति अली अल जैदी भी शामिल हैं। ट्रंप ने जैदी का समर्थन किया है, जो कि उन नेताओं को समर्थन देने की अपनी नीति का हिस्सा है, जो बाद में अमेरिकी हितों के लिए काम करते हैं।
ट्रंप का समर्थन और शर्तें
हाल ही में, ट्रंप ने अली जैदी को वाशिंगटन बुलाया। इस मुलाकात के बाद, ट्रंप ने कहा कि वह जैदी के साथ हर संभव तरीके से खड़े हैं। हालांकि, यह समर्थन एक शर्त के साथ है: यदि जैदी इराक के प्रधानमंत्री बनते हैं, तो उन्हें ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों को देश से बाहर करना होगा और ईरान के प्रभाव को कम करना होगा।
अमेरिका की रणनीति
अमेरिका ईरान को घेरने के लिए उसके पड़ोसी देशों का सहारा ले रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने जैदी के एक बैंक के साथ डॉलर के लेन-देन पर रोक लगा दी थी, क्योंकि अमेरिका को संदेह था कि यह बैंक ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े एक मिलिशिया नेता के साथ व्यापार कर रहा था।
ट्रंप का दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, अली अल जैदी शुरू में ट्रंप की पसंद नहीं थे, लेकिन उनका नाम तब सामने आया जब ट्रंप ने इराक को अमेरिकी सहायता बंद करने की धमकी दी। इस साल, ईरान के करीबी पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी भी प्रधानमंत्री पद के लिए मजबूत उम्मीदवार बनकर उभरे हैं, जिससे ट्रंप ने जैदी का समर्थन किया।
ईरान के मिलिशिया पर ट्रंप का आदेश
इन घटनाक्रमों के बीच, ईरान के IRGC के शीर्ष अधिकारी इस्माइल कानी ने ट्रंप के आदेश को खारिज करने की मांग की है, जिसमें इराक में मिलिशिया नेताओं को सरकार से बाहर रखने का निर्देश दिया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय इराक में मौजूद मिलिशिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की योजना बना रहा है, क्योंकि इन मिलिशिया समूहों पर अमेरिका का आरोप है कि उन्होंने US-इजरायल युद्ध के दौरान इराक में अमेरिकी डिप्लोमैटिक और सैन्य ठिकानों पर 600 हमले किए हैं।
