पाकिस्तान में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास का चरणबद्ध बंद होना, सुरक्षा कारणों से निर्णय
पाकिस्तान को अमेरिका का बड़ा झटका
पाकिस्तान, जो ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता का प्रयास कर रहा था, को हाल ही में अमेरिका से एक महत्वपूर्ण झटका मिला है। पेशावर में स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को अब बंद करने का निर्णय लिया गया है। अमेरिका ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए पाकिस्तान पर सुरक्षा में कमी का आरोप लगाया है। इससे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि को नुकसान पहुंचा है, साथ ही ईरान के साथ शांति वार्ता की कोशिशों को भी प्रभावित किया है।
वाणिज्य दूतावास का बंद होना
अमेरिका ने अपने कर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पेशावर में वाणिज्य दूतावास को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का निर्णय लिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस संबंध में जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की है। इसके बाद, पेशावर में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बंद होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इस्लामाबाद से संचालन
अमेरिकी विदेश विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पेशावर में वाणिज्य दूतावास के बंद होने के बाद, अमेरिका पाकिस्तान में अपने कार्यों को इस्लामाबाद स्थित दूतावास से संचालित करेगा। खैबर पख्तूनख्वा के साथ राजनयिक संबंधों की जिम्मेदारी अब इस्लामाबाद को सौंप दी जाएगी।
निर्णय के पीछे का कारण
अमेरिका ने अपने राजनयिक कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। एक बयान में कहा गया है, 'यह निर्णय हमारे राजनयिक कर्मचारियों की सुरक्षा और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।' इसके साथ ही, अमेरिका ने पाकिस्तान के प्रति अपनी प्राथमिकताओं में कोई बदलाव नहीं होने की बात कही है।
कॉन्सुलेट का स्थान
अमेरिका का यह कॉन्सुलेट खैबर पख्तूनख्वा में स्थित था। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि वे स्थानीय नेताओं और समुदायों के साथ संपर्क बनाए रखेंगे, ताकि आर्थिक संबंधों को बढ़ावा दिया जा सके और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। अमेरिका पिछले एक वर्ष से इस कॉन्सुलेट को बंद करने की योजना पर कार्यरत था। इसके अलावा, इस्लामाबाद, कराची और लाहौर में अमेरिका के अन्य कॉन्सुलेट भी मौजूद हैं।
