चीन की ऊर्जा रणनीति: होर्मुज संकट में आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन
इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका वार्ता का परिणाम
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई बैठक का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। इस स्थिति से बौखलाए डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नई नाकेबंदी की घोषणा की है। पहले ईरान ने इस जलडमरूमध्य से तेल से भरे जहाजों के गुजरने पर रोक लगाई थी, और अब अमेरिका भी उन्हें गुजरने नहीं दे रहा है। इस अस्थिरता का सबसे अधिक प्रभाव चीन पर पड़ा है। चीन के विदेश मंत्री वांग ली ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे वैश्विक हितों के खिलाफ बताया है.
चीन की ऊर्जा आत्मनिर्भरता
चीन के आधिकारिक समाचार पत्र 'ग्लोबल टाइम्स' ने बार-बार यह दावा किया है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहता है और ईरान का तेल चीन तक नहीं पहुंचता, तो भी चीन पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा। चीन अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए लगभग आत्मनिर्भर है। 14 अप्रैल से अब तक, ट्रंप के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है, फिर भी चीन इस स्थिति से चिंतित नहीं है.
चीन के लिए संकट का आकलन
अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरान से आने-जाने वाले जहाजों पर रोक लग गई है, जबकि दुनिया का लगभग एक चौथाई तेल इसी मार्ग से गुजरता है। चीन इस संकट में सबसे बड़ा तेल खरीदार है, क्योंकि होर्मुज से गुजरने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 40 प्रतिशत चीन के लिए है.
चीन की ऊर्जा योजना
चीन बार-बार यह संकेत दे रहा है कि इस नाकेबंदी से उसे ज्यादा नुकसान नहीं होगा, लेकिन होर्मुज में स्थिति सामान्य होनी चाहिए। चीन की ऊर्जा योजना बहुत सुव्यवस्थित है, और उसने पहले से ही अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तेल का भंडारण किया है.
चीन की ऊर्जा रणनीतियाँ
- इलेक्ट्रिक गाड़ियां: चीन में आधी से ज्यादा गाड़ियां अब इलेक्ट्रिक हैं, जिससे तेल की खपत में कमी आई है।
- इलेक्ट्रिक ग्रिड: चीन की बिजली ग्रिड घरेलू कोयला, सौर ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भर है।
- बहुस्तरीय पेट्रोलियम आयात: चीन विभिन्न देशों से तेल खरीदता है, जिससे वह अमेरिकी प्रतिबंधों से प्रभावित नहीं होता।
- पाइपलाइन वाला दांव: चीन रूस और मध्य एशिया से गैस की आपूर्ति पाइपलाइन के माध्यम से करता है।
- भरपूर तेल स्टॉक: चीन के पास 1.3 से 1.4 अरब बैरल तेल का स्टॉक है, जो लगभग 4 महीने के आयात के बराबर है।
चीन की ऊर्जा निर्भरता
चीन कोयले और नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भर है, जिसमें कोयले की हिस्सेदारी 51.4 प्रतिशत है। यही कारण है कि अन्य एशियाई देशों को परेशानी हो रही है, लेकिन चीन को नहीं।
चीन को संभावित नुकसान
वैश्वीकरण के इस युग में, देशों की आपसी निर्भरता के कारण, यदि कोई दो देश उलझते हैं, तो इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर पड़ता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन की छोटी रिफाइनरियों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि उन्हें ईरान से तेल नहीं मिल पा रहा है।
