नासा के आर्टेमिस 2 मिशन ने चांद के ओरिएंटेल बेसिन की पहली तस्वीरें साझा कीं
नासा का ऐतिहासिक मिशन
अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा ने अपने आर्टेमिस 2 मिशन के तहत अंतरिक्ष में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद के एक विशेष क्षेत्र, 'ओरिएंटेल बेसिन', की एक स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत की है। यह पहली बार है जब किसी व्यक्ति ने चांद के इस विशाल गड्ढे को इतनी निकटता से देखा है, जो धरती से कभी दिखाई नहीं देता।
ओरिएंटेल बेसिन का महत्व
ओरिएंटेल बेसिन चांद की सतह पर एक विशाल और अद्वितीय गड्ढा है, जो करोड़ों वर्ष पहले एक बड़े उल्कापिंड के टकराने से बना था। इसका व्यास लगभग 900 किलोमीटर है और यह एक निशाने के आकार का प्रतीत होता है। इसमें तीन गोल पहाड़ी घेरे हैं, जो वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये चांद के प्राचीन इतिहास और अंतरिक्ष में टकराव के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। अब तक इसे केवल मशीनों ने देखा था, लेकिन अब इंसानों ने इसे पहली बार अपनी आंखों से देखा है।
मिशन में शामिल चार अंतरिक्ष यात्री
इस ऐतिहासिक यात्रा में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जो नए रिकॉर्ड स्थापित कर रहे हैं। कमांडर रीड वाइसमैन इस मिशन का नेतृत्व कर रहे हैं। विक्टर ग्लोवर चांद के मिशन पर जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति बने हैं। क्रिस्टीना कोच इस यात्रा के साथ चांद तक पहुंचने वाली पहली महिला हैं, जबकि जेरेमी हैनसेन कनाडा के पहले नागरिक हैं, जो इस दूरी तक पहुंचे हैं।
नया वर्ल्ड रिकॉर्ड
यह मिशन अंतरिक्ष में दूरी तय करने का एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने की दिशा में है। आर्टेमिस 2 लगभग 4 लाख किलोमीटर (2,52,000 मील) की दूरी तय करेगा। इससे पहले यह रिकॉर्ड अपोलो 13 मिशन के नाम था। रिपोर्ट के अनुसार, रविवार तक यह अंतरिक्ष यान चांद की आधी दूरी तय कर चुका था। यह यान चांद के चारों ओर एक चक्कर लगाएगा और बिना वहां उतरे वापस धरती की ओर लौटेगा।
अंतरिक्ष में टॉयलेट की समस्या
इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को एक अजीब समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ओरियन कैप्सूल का टॉयलेट सिस्टम खराब हो गया है। नासा के इंजीनियरों का मानना है कि पाइपलाइन में बर्फ जमने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। जब तक इसे ठीक नहीं किया जाता, तब तक अंतरिक्ष यात्रियों को बैकअप के रूप में यूरिन कलेक्शन बैग का उपयोग करने के लिए कहा गया है। हालांकि, नासा ने आश्वासन दिया है कि क्रू पूरी तरह सुरक्षित है और मिशन पर कोई खतरा नहीं है।
मिशन का सफर
यह मिशन 1972 के बाद पहली बार इंसानों को चांद के इतने करीब ले जा रहा है। यह 10 दिनों का सफर है, जो 1 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ था। ये अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर नहीं उतरेंगे, बल्कि उसके पीछे से एक चक्कर लगाकर वापस आएंगे। यह यान 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में गिरेगा, जहां से इन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा। इस मिशन की सफलता के बाद, नासा 2028 तक इंसानों को चांद पर उतारने की योजना बनाएगा।
