Donald Trump का NATO सहयोगियों पर तीखा हमला: क्या हैं उनके आरोप?
ट्रंप का ईरान और NATO पर बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजराइल के सैन्य अभियानों के बीच नाटो सहयोगियों पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि जो देश लंबे समय से अमेरिका के साथ खड़े रहे हैं, वे इस बार खुलकर समर्थन देने से कतराते नजर आ रहे हैं। ट्रंप ने Truth Social पर एक पोस्ट में लिखा कि NATO की स्थिति अमेरिका के बिना 'कागज़ी शेर' जैसी हो जाती है।
नाटो देशों की निष्क्रियता पर ट्रंप की नाराजगी
ट्रंप ने अपने बयान में नाटो देशों पर आरोप लगाया कि वे परमाणु क्षमता वाले ईरान के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई में शामिल नहीं होना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा संघर्ष को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है, और अब जोखिम पहले की तुलना में कम हो गया है। इसके बावजूद, सहयोगी देश आगे आने से हिचकिचा रहे हैं, जो ट्रंप के अनुसार निराशाजनक है।
Strait of Hormuz का महत्व
ट्रंप ने विशेष रूप से Strait of Hormuz का उल्लेख किया, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जहाजों की आवाजाही को बनाए रखना कोई बड़ा सैन्य अभियान नहीं है, बल्कि अपेक्षाकृत सरल कार्य है। फिर भी, सहयोगी देश इसमें योगदान देने से कतराते हैं, जबकि वही देश तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंतित हैं।
युद्ध से जुड़े फैसलों में सहयोगी देशों की भूमिका
ट्रंप ने यह भी कहा कि कई देशों ने युद्ध से संबंधित निर्णयों में सलाह या भागीदारी नहीं की, लेकिन अब वे वैश्विक बाजारों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं। 28 फरवरी से शुरू हुए इस सैन्य अभियान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है, हजारों लोगों की जानें गई हैं, और बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
सहयोगी देशों को 'कायर' कहकर ट्रंप ने जताई नाराजगी
ट्रंप ने अपने बयान में सहयोगी देशों को 'कायर' करार दिया और संकेत दिया कि अमेरिका भविष्य में इस रवैये को याद रखेगा। दूसरी ओर, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड, जापान और कनाडा जैसे देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई ठोस कदम मौजूदा संघर्ष की स्थिति पर निर्भर करेगा। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने कहा कि उनका देश इस टकराव का हिस्सा नहीं है और वह अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति बनाए रखने को प्राथमिकता देगा।
