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G7 शिखर सम्मेलन में मोदी-ट्रंप की संभावित मुलाकात, वैश्विक कूटनीति का नया अध्याय

इस महीने फ्रांस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भागीदारी की पुष्टि हो चुकी है। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच द्विपक्षीय वार्ता की संभावनाएं बढ़ गई हैं। यह सम्मेलन 15 से 17 जून तक आयोजित होगा, जिसमें ट्रंप को वैश्विक नेताओं से बातचीत करने का पहला बड़ा अवसर मिलेगा। जानें इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के बारे में और मोदी-ट्रंप की संभावित मुलाकात के प्रभावों के बारे में।
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G7 शिखर सम्मेलन में मोदी-ट्रंप की संभावित मुलाकात, वैश्विक कूटनीति का नया अध्याय

G7 शिखर सम्मेलन का महत्व

इस महीने फ्रांस में आयोजित होने वाला G7 शिखर सम्मेलन वैश्विक कूटनीति का एक प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सम्मेलन में अपनी भागीदारी की पुष्टि की है, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुलाकात की संभावनाएं बढ़ गई हैं। यह सम्मेलन 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में होगा। ट्रंप के लिए यह मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों के बीच वैश्विक नेताओं से आमने-सामने बातचीत करने का पहला बड़ा अवसर होगा।


ट्रंप की यात्रा की घोषणा

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी यात्रा की जानकारी देते हुए कहा कि वह 14 जून को व्हाइट हाउस में UFC कार्यक्रम में भाग लेने के बाद फ्रांस के लिए रवाना होंगे। उन्होंने 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, "मैं G7 शिखर सम्मेलन के लिए फ्रांस जाऊंगा। यह यात्रा व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में UFC विश्व चैंपियनशिप फाइट्स के बाद होगी, जो अमेरिकी इतिहास की सबसे मनोरंजक रातों में से एक होगी।"


मोदी-ट्रंप की संभावित मुलाकात

फ्रांस ने भारत को एक सहयोगी राष्ट्र के रूप में आमंत्रित किया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और फ्रांस के यूरोप और विदेश मामलों के मंत्री जीन-नोएल बैरो के बीच हुई बातचीत में मोदी की भागीदारी की पुष्टि की गई। हालांकि, भारत की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों मंत्रियों ने इस बात का स्वागत किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने एवियन शिखर सम्मेलन में भागीदारी की पुष्टि की है। इस संदर्भ में, दोनों ने G7 के कार्यों में भारत के योगदान पर जोर दिया।


मोदी और ट्रंप की पिछली मुलाकात पिछले साल फरवरी में हुई थी। उस समय से, व्यापार समझौतों और टैरिफ के कारण भारत और अमेरिका के संबंधों में कुछ तनाव आया है। फिर भी, दोनों नेता फोन पर संपर्क में रहे हैं।


विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों को सुधारने का एक अवसर हो सकती है।