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H1B वीजा विवाद: अमेरिका में भारतीयों की स्थिति पर उठे सवाल

H1B वीजा विवाद ने अमेरिका और भारत के बीच नए सवाल खड़े कर दिए हैं। फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डिसैंटिस ने इसे एक धोखा बताया है, जबकि कमर्शियल सेक्रेटरी ने इसे घोटाला करार दिया है। भारतीयों की H1B वीजा धारक संख्या 70% से अधिक है, और अमेरिका में टैरिफ बढ़ने से उनकी स्थिति पर असर पड़ सकता है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है और इसका भारतीय IT कंपनियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
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H1B वीजा विवाद: अमेरिका में भारतीयों की स्थिति पर उठे सवाल

H1B वीजा पर नया विवाद

H1B वीजा समाचार अपडेट: भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते टैरिफ विवाद के बीच एक नया मुद्दा सामने आया है। फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डिसैंटिस ने कहा है कि H1B वीजा एक धोखा है, क्योंकि इसके धारक ज्यादातर भारत से आते हैं। यह एक प्रकार की कॉटेज इंडस्ट्री बन गई है, जो मुख्य रूप से एक ही देश से संबंधित है। अमेरिका में H1B वीजा और ग्रीन कार्ड कार्यक्रम को समाप्त करने की मांग उठ रही है।


फ्लोरिडा के गवर्नर की राय

रिपब्लिकन पार्टी के नेता और ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी H1B वीजा और ग्रीन कार्ड कार्यक्रम को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। गवर्नर डिसैंटिस का कहना है कि H1B वीजा धारक मुख्यतः भारत के हैं और वे अमेरिकी कंपनियों में कार्यरत हैं, लेकिन इससे अमेरिका के नागरिकों को रोजगार नहीं मिल रहा है। H1B धारकों को नौकरी पर रखने में प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ सकता है।


कमर्शियल सेक्रेटरी की टिप्पणी

अमेरिका के कमर्शियल सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक ने फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में H1B वीजा को घोटाला बताया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि अमेरिका के लोगों को नौकरियों पर रखा जाए और ट्रंप प्रशासन से अनुरोध किया कि वे वीजा कार्यक्रम की समीक्षा करें। H1B धारकों के लिए कंपनियों की नीतियां फायदेमंद नहीं हैं। अमेरिकी नागरिकों की औसत वार्षिक आय 75,000 डॉलर है, जबकि ग्रीन कार्ड धारकों की 66,000 डॉलर है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनियां कम वेतन पर काम करने वाले लोगों को प्राथमिकता दे रही हैं।


H1B वीजा धारकों की संख्या

US सिटीज़नशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के अनुसार, अमेरिका के H1B वीजा कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी भारतीय हैं, जिनकी हिस्सेदारी 70% से अधिक है। चीन 12-13% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है। USCIS ने 2025 के आंकड़े जारी नहीं किए हैं, लेकिन 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में H1B धारकों की संख्या 309,986 (73.9%) थी। अक्टूबर 2022 से सितंबर 2023 तक 279,000 (72.3%) भारतीयों को H1B वीजा मिला था। अप्रैल-सितंबर 2024 में 130,000 भारतीयों को H1B वीजा आवंटित किए गए थे।


H1B वीजा कार्यक्रम का परिचय

H1B वीजा एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है, जो अमेरिका द्वारा दिया जाता है, जिससे दूसरे देशों के लोग अमेरिकी कंपनियों में नौकरी कर सकते हैं। यह वीजा उच्च शिक्षा, विशेष कौशल या तकनीकी विशेषज्ञों को दिया जाता है, जैसे IT और सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डॉक्टर, वित्तीय पेशेवर आदि। यह वीजा 3 साल के लिए दिया जाता है, जिसे 3 और साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।


टैरिफ का प्रभाव

अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है, जिसका असर भारतीय IT कंपनियों और H1B वीजा धारकों पर पड़ सकता है। इससे अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय H1B धारकों को नियुक्त करना महंगा हो जाएगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने H1B वीजा कार्यक्रम के नियमों को पहले से अधिक सख्त कर दिया है, जिससे भारतीय H1B धारकों की नौकरियों पर खतरा बढ़ गया है और नए वीजा प्राप्त करने में भी कठिनाई हो रही है। टैरिफ लागू होने के बाद भारतीयों को और अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।