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पाकिस्तान ने सऊदी अरब में फाइटर जेट तैनात किए, ईरान-अमेरिका वार्ता के बीच

पाकिस्तान ने सऊदी अरब में अपने फाइटर जेट तैनात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। यह कदम पिछले साल हुए रक्षा समझौते के तहत उठाया गया है, जिसमें किसी एक देश पर हमले को दूसरे पर हमला माना जाएगा। जानें इस सैन्य तैनाती के पीछे की रणनीति और इसके संभावित प्रभाव।
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पाकिस्तान ने सऊदी अरब में फाइटर जेट तैनात किए, ईरान-अमेरिका वार्ता के बीच

पाकिस्तान की नई सैन्य तैनाती

इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत के चलते, पाकिस्तान ने सऊदी अरब में अपने लड़ाकू विमानों को तैनात करना शुरू कर दिया है। यह कदम ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल के बीच लगभग 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद उठाया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच हुए रक्षा समझौते को अब लागू किया गया है।


सऊदी अरब का बयान

सऊदी अरब ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान से एक सैन्य बल का आगमन किंग अब्दुलअजीज एयरपोर्ट पर हुआ है, जो कि दोनों मित्र देशों के बीच हस्ताक्षरित रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते के तहत है।


पाकिस्तान ने क्या भेजा?

बयान में यह भी बताया गया कि एयरपोर्ट पर लड़ाकू और सहायक फाइटर प्लेन तैनात किए गए हैं। इनका उद्देश्य दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच संयुक्त सैन्य समन्वय को बढ़ावा देना और परिचालन तत्परता को बढ़ाना है।


सामरिक समझौता

गौरतलब है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच 17 सितंबर को एक सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौता हुआ था। इस समझौते के अनुसार, यदि किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे दूसरे देश पर भी हमला माना जाएगा। यह प्रावधान नाटो के आर्टिकल 5 के समान है, जिसमें किसी एक सदस्य पर हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है।


सीजफायर के बाद की तैनाती

ईरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ लगभग 40 दिनों तक संघर्ष किया, जिसमें उसने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और ओमान पर हजारों मिसाइलों से हमला किया। सऊदी अरब के निमंत्रण पर, पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर भी रियाद पहुंचे। कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान पर युद्ध में शामिल होने का दबाव डाला, लेकिन पाकिस्तान ने संघर्ष के दौरान युद्ध में शामिल होने का जोखिम नहीं उठाया। अब, युद्ध समाप्त होने के बाद, उसने सऊदी अरब में अपने फाइटर जेट तैनात कर दिए हैं।