सूडान में ईरान के खिलाफ बुरहान का रुख, बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता
सूडान में राजनीतिक संकट का नया मोड़
अमेरिका और इजरायल के साथ 40 दिनों तक चले संघर्ष का प्रभाव अब विभिन्न देशों में महसूस किया जा रहा है। सूडानी सशस्त्र बलों के प्रमुख अब्देल फत्ताह अल-बुरहान ने सऊदी अरब पर ईरानी हमलों की आलोचना की है, लेकिन यह बयान उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। उनके इस बयान के बाद सूडानी सेना के भीतर मतभेद उभरने लगे हैं।
अल-बुरहान का राजनीतिक इतिहास
सूडान के पूर्व तानाशाह उमर अल-बशीर ने 2015 में यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब और यूएई का समर्थन किया था। उन्होंने अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) को भेजा था। 2019 में तख्तापलट के बाद, अल-बुरहान ने सत्ता संभाली।
ईरान का समर्थन, लेकिन बुरहान का विरोध
बुरहान ने ईरान के खिलाफ सऊदी अरब का समर्थन किया, जबकि ईरान ने उनके सैन्य संगठन SAF को ड्रोन प्रदान किए। हालांकि, बुरहान ने युद्ध के दौरान ईरान के खिलाफ खाड़ी देशों का समर्थन किया।
अब्दुल्ला का ईरान के प्रति समर्थन
बुरहान के करीबी सहयोगी अल-नाजी अब्दुल्ला ने ईरान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका और इजरायल ईरान पर आक्रमण जारी रखते हैं, तो वे अपनी सेना भेजने के लिए तैयार हैं।
गिरफ्तारी और राजनीतिक दबाव
अब्दुल्ला को बुरहान के आदेश पर गिरफ्तार किया गया। बुरहान ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति सूडानी सरकार के विदेश मामलों पर अलग राय रखता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
क्या सूडान में नई जंग की संभावना?
बुरहान ने सऊदी अरब और मिस्र के दबाव में ईरान के खिलाफ रुख अपनाया है, लेकिन देश में उनके इस रुख का विरोध हो रहा है। यह देखना होगा कि क्या ईरान सूडान में एक नई जंग की शुरुआत कर सकता है।
यूएई का सूडान में प्रभाव
बुरहान ने खाड़ी देशों पर ईरानी हमलों की निंदा की, लेकिन यूएई का नाम नहीं लिया। यह इसलिए है क्योंकि यूएई ने आरएसएफ का समर्थन किया है। वर्तमान में SAF का कब्जा खार्तूम और अन्य क्षेत्रों पर है, जबकि यूएई समर्थित आरएसएफ दारफुर और कोरडोफान में सक्रिय है।
