UAE का OPEC से बाहर निकलना: क्या है इसके पीछे की रणनीति?
संयुक्त अरब अमीरात का बड़ा निर्णय
नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC और OPEC+ से बाहर निकलने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। UAE 1 मई 2026 से इन संगठनों की सदस्यता समाप्त कर देगा।
ऊर्जा मंत्री का बयान
UAE के ऊर्जा मंत्री ने बताया कि यह निर्णय ऊर्जा क्षेत्र, पेट्रोलियम और रणनीतिक नीतियों की गहन समीक्षा के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऊर्जा की मांग में वृद्धि होने की संभावना है, इसलिए UAE ने अपनी ऊर्जा नीति को स्वतंत्र रूप से विकसित करने का निर्णय लिया है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट में मौजूदा चुनौतियों और तेल बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि बाजार पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
सऊदी अरब को झटका
UAE का OPEC से बाहर होना सऊदी अरब के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। UAE लंबे समय से OPEC का एक महत्वपूर्ण सदस्य रहा है, और इसका बाहर निकलना संगठन की एकता और शक्ति को कमजोर कर सकता है। ईरान के साथ चल रहे संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट की अनिश्चितता के बीच, यह निर्णय OPEC के भीतर मतभेदों को उजागर कर रहा है।
क्या यह ट्रंप की जीत है?
कई विशेषज्ञ UAE के इस निर्णय को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मानते हैं। ट्रंप ने OPEC पर आरोप लगाया है कि यह संगठन तेल की कीमतें बढ़ाकर वैश्विक स्तर पर शोषण कर रहा है। UAE अमेरिका का एक करीबी सहयोगी देश है।
हाल के दिनों में, UAE ने अन्य अरब देशों की आलोचना भी की है। UAE के राष्ट्रपति के कूटनीतिक सलाहकार अनवर गरगाश ने कहा कि ईरानी हमलों के समय गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) देशों ने राजनीतिक और सैन्य स्तर पर कमजोर रुख अपनाया।
फ्यूल संकट की चिंता
वर्तमान में होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पहले से ही प्रभावित है। ऐसे में UAE जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश का OPEC छोड़ना अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में और अधिक अनिश्चितता पैदा कर सकता है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है। UAE का यह कदम वैश्विक ऊर्जा राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।
