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USS Gerald R. Ford: अमेरिका का सबसे बड़ा युद्धपोत टॉयलेट संकट से जूझ रहा है

USS Gerald R. Ford, अमेरिका का सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत, ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच एक अजीब समस्या का सामना कर रहा है। जहाज पर टॉयलेट सिस्टम की खराबी के कारण हजारों सैनिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, 650 टॉयलेट में से अधिकांश जाम हो चुके हैं, जिससे सैनिकों को उपयोग के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। जानें इस संकट के पीछे की वजहें और अमेरिकी नौसेना का क्या कहना है।
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USS Gerald R. Ford: अमेरिका का सबसे बड़ा युद्धपोत टॉयलेट संकट से जूझ रहा है

मध्य पूर्व में तनाव और USS Gerald R. Ford की स्थिति


नई दिल्ली: मध्य पूर्व में ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कठोर कदम उठाने की चेतावनी दी है। इस दौरान, अमेरिका ने अपने सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford को क्षेत्र में तैनात किया है। हालांकि, इस $13 बिलियन के युद्धपोत पर एक अजीब समस्या उत्पन्न हो गई है। जहाज पर तैनात हजारों सैनिकों को टॉयलेट की खराबी के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।


टॉयलेट की समस्या और लंबी कतारें

रिपोर्टों के अनुसार, USS Gerald R. Ford पर 650 टॉयलेट हैं, जिनमें से अधिकांश जाम हो चुके हैं। यह वैक्यूम-बेस्ड सीवेज सिस्टम (VCHT) पानी की बचत के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन 4,600 से अधिक क्रू मेंबर्स के दबाव में यह बार-बार विफल हो रहा है। पाइपों के छोटे आकार और कैल्शियम के जमाव के कारण क्लॉगिंग की समस्या उत्पन्न हो रही है।


सैनिकों को टॉयलेट का उपयोग करने के लिए 45 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि रोजाना एक से अधिक मेंटेनेंस कॉल आती हैं। 2025 में चार दिनों में 200 से अधिक ब्रेकडाउन हुए, जिसके कारण इंजीनियरों को 19-19 घंटे काम करना पड़ा। 2023 से अब तक 40 से अधिक बार बाहरी सहायता ली गई है।


लंबी तैनाती के कारण बढ़ी समस्याएं

यह युद्धपोत जून 2025 से समुद्र में है। पहले यह वेनेजुएला ऑपरेशन में शामिल हुआ, जहां राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया गया। अब ईरान के साथ तनाव के कारण इसकी तैनाती 8-11 महीने तक बढ़ गई है। रिकॉर्ड तोड़ लंबी ड्यूटी के कारण नियमित मेंटेनेंस नहीं हो पा रहा है, जिससे समस्याएं और गंभीर हो गई हैं।


नौसेना का बयान

अमेरिकी नौसेना का कहना है कि यह समस्या मिशन या युद्ध क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं डाल रही है। स्थिति में सुधार हो रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी समस्याएं लंबे समय तक रहने से सैनिकों का मनोबल गिरा सकती हैं और कार्यक्षमता पर असर डाल सकती हैं।


ईरान के साथ संभावित संघर्ष के समय, दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत 'टॉयलेट वॉर' से जूझ रहा है। यह घटना तकनीकी कमियों और लंबी तैनाती के दुष्परिणामों की याद दिलाती है।