अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष: क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में बदलाव
पश्चिम एशिया के संघर्षों के बीच छिपा युद्ध
इस समय दुनिया की नजर पश्चिम एशिया के संघर्षों पर है, लेकिन दक्षिण और मध्य एशिया की सीमा पर एक ऐसा युद्ध भड़क चुका है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजरअंदाज किया जा रहा है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रहा यह संघर्ष केवल सीमा झड़प नहीं है, बल्कि यह आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र की सामरिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।
खुली सैन्य भिड़ंत का रूप ले चुका संघर्ष
27 फरवरी 2026 से शुरू हुआ यह युद्ध अब खुली सैन्य भिड़ंत में बदल चुका है। हाल के हमलों में पाकिस्तान ने काबुल और कंधार जैसे महत्वपूर्ण शहरों पर हवाई और तोपखाने से हमले किए हैं, जिनमें नागरिकों की मौत की खबरें आई हैं। काबुल में चार लोगों की मौत और पंद्रह घायल होने की पुष्टि हुई है, जबकि कंधार हवाई अड्डे के पास ईंधन भंडार को भी निशाना बनाया गया। तालिबान प्रशासन का कहना है कि इन हमलों में महिलाएं और बच्चे भी मारे गए हैं।
सीमा पार गोलाबारी और मानवीय संकट
पूर्वी अफगानिस्तान के खोस्त और पकतिया क्षेत्रों में भी सीमा पार गोलाबारी से लगातार मौतें हो रही हैं। तालिबान के अनुसार, एक ही परिवार के चार लोग, जिनमें दो बच्चे भी शामिल थे, तोप और मोर्टार हमले में मारे गए। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के अंत से मार्च के पहले सप्ताह तक पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई में 56 नागरिकों की जान जा चुकी है, जिनमें 24 बच्चे शामिल हैं। इस संघर्ष के कारण लगभग 1,15,000 लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच अविश्वास
इस युद्ध की जड़ें पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पुरानी अविश्वास में हैं, जो तालिबान की सत्ता वापसी के बाद और गहरा गया है। इस्लामाबाद का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन पर तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान नामक उग्रवादी संगठन को शरण दी जा रही है। यह संगठन पाकिस्तान में कई घातक हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है।
भारत और चीन की भूमिका
इस संघर्ष का महत्व केवल अफगानिस्तान और पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। भारत और चीन भी इस स्थिति में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं। पाकिस्तान की चिंता यह है कि अफगानिस्तान तेजी से भारत के प्रभाव क्षेत्र में आ रहा है। वहीं, भारत के लिए अफगानिस्तान के साथ मजबूत संबंध सामरिक लाभ का अवसर है।
चीन की बढ़ती भूमिका
चीन की भूमिका भी इस समीकरण में महत्वपूर्ण है। पिछले दशक में पाकिस्तान की सेना और रक्षा व्यवस्था तेजी से चीनी तकनीक और हथियारों पर निर्भर हो गई है। 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सीमित सैन्य कार्रवाई के दौरान यह नया समीकरण स्पष्ट हुआ था।
संघर्ष का व्यापक प्रभाव
इसलिए, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मौजूदा युद्ध को केवल सीमा विवाद मानना गलत होगा। यह एक नए सुरक्षा परिदृश्य की पहली झलक है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो यह संकट पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैला सकता है।
भविष्य की भू-राजनीति
हालांकि दुनिया इस युद्ध को नजरअंदाज कर रही है, लेकिन यह अफगानिस्तान-पाकिस्तान टकराव दक्षिण और मध्य एशिया की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है। यदि इसमें भारत और चीन के हित उलझते हैं, तो यह संघर्ष एक व्यापक भू-राजनीतिक मुकाबले का रूप ले सकता है।
