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अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ता तनाव: क्या है डूरंड लाइन का सच?

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन पर हालात गंभीर हो गए हैं। मंगलवार को अफगान सेना ने पाकिस्तानी चौकियों पर हमला किया, जो कि रविवार को पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों का जवाब था। इस संघर्ष ने क्षेत्र की शांति को खतरे में डाल दिया है। अफगानिस्तान ने अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी थी। जानें इस तनाव के पीछे की वजहें और इसके संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं।
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अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ता तनाव: क्या है डूरंड लाइन का सच?

नई दिल्ली में बढ़ते संघर्ष की खबर


नई दिल्ली: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन पर हालात एक बार फिर युद्ध जैसे बन गए हैं। मंगलवार की शाम को अफगान सेना ने सीमा पर स्थित पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर तीव्र गोलीबारी शुरू कर दी। यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा रविवार तड़के किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई है। इस संघर्ष ने क्षेत्र की शांति को गंभीर खतरे में डाल दिया है, और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग भयभीत हैं। दोनों पक्षों द्वारा भारी हथियारों का उपयोग किया जा रहा है।


सीमा पर जवाबी कार्रवाई की तीव्रता

अफगान सेना ने नंगरहार प्रांत के नाजियान और डरबाबा जिलों में डूरंड लाइन के निकट पाकिस्तानी ठिकानों पर हमले किए। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इन हमलों में कई पाकिस्तानी सैन्य चौकियां पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं। हालांकि, अफगान तालिबान ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन जमीनी रिपोर्टें यह दर्शाती हैं कि यह कार्रवाई पूर्व नियोजित थी। रविवार के हवाई हमले के बाद अफगानिस्तान ने पहले ही कड़े जवाब की चेतावनी दी थी, जिसे अब लागू किया गया है।


हवाई हमलों से उपजी तनाव

तनाव का मुख्य कारण रविवार तड़के पाकिस्तानी सेना द्वारा अफगानिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में किए गए हवाई हमले हैं। पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने टीटीपी जैसे आतंकवादी संगठनों के ठिकानों को नष्ट करने के लिए यह कदम उठाया है। लेकिन अफगानिस्तान ने इन दावों को खारिज कर दिया है, यह कहते हुए कि पाकिस्तान ने सैन्य ठिकानों के बजाय नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया, जिसमें कई निर्दोष महिलाएं और बच्चे मारे गए। इसी कारण से सीमा पर तनाव बढ़ा है।


क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा का संकल्प

रविवार के हमलों के बाद, अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि वे अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का हमला उनकी संप्रभुता का उल्लंघन है और वे इसका जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं। मंगलवार की सैन्य कार्रवाई इसी आधिकारिक रुख का परिणाम है। अफगान बलों ने उन स्थानों को निशाना बनाया है जहां से सीमा पार गतिविधियों का संदेह था।


आतंकवाद और पनाहगाहों का विवाद

पाकिस्तान ने लगातार आरोप लगाया है कि अफगानिस्तान की भूमि का उपयोग उसके खिलाफ आतंकवादी हमलों के लिए किया जा रहा है। इस्लामाबाद का तर्क है कि टीटीपी जैसे संगठन वहां सुरक्षित पनाह पा रहे हैं। इसी कारण पिछले साल अक्टूबर में भी दोनों देशों के बीच गंभीर सैन्य तनाव उत्पन्न हुआ था। तब अरब देशों की मध्यस्थता से किसी तरह सीजफायर हुआ था, लेकिन हालिया हवाई हमले और जवाबी फायरिंग ने उस शांति समझौते को लगभग समाप्त कर दिया है।


बॉर्डर पर सैन्य जमावड़ा

इस समय डूरंड लाइन के आसपास दोनों देशों ने अपनी सैन्य गश्त और चौकसी को बढ़ा दिया है। सीमा के कई संवेदनशील स्थानों पर भारी तोपखाने तैनात किए गए हैं। नंगरहार और आसपास के जिलों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षा के मद्देनजर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कई स्थानों पर अभी भी रुक-रुक कर फायरिंग जारी है। यदि कूटनीतिक स्तर पर इस तनाव को कम नहीं किया गया, तो यह छिटपुट झड़प एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकती है।