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अमेरिका-ईरान तनाव: क्या है शांति प्रस्ताव का सच?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ईरान ने अमेरिका को एक नया शांति प्रस्ताव भेजा, जिसे ट्रंप ने अस्वीकार कर दिया। इस प्रस्ताव में युद्धविराम और प्रतिबंधों में राहत की मांग की गई थी। पाकिस्तान इस वार्ता में मध्यस्थता कर रहा है। जानिए इस जटिल स्थिति के पीछे की कहानी और दोनों देशों के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण।
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अमेरिका-ईरान तनाव: क्या है शांति प्रस्ताव का सच?

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव


अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों देशों के बीच युद्ध को रोकने के प्रयास लगातार विफल होते जा रहे हैं। इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते संकट और अमेरिका की नाकेबंदी ने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है।


ईरान का शांति प्रस्ताव

तनाव को कम करने के लिए, ईरान ने अमेरिका को एक नया शांति प्रस्ताव भेजा, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुरंत अस्वीकार कर दिया। ईरान ने युद्धविराम, प्रतिबंधों में छूट और होर्मुज पर अपनी संप्रभुता को मान्यता देने की शर्तें रखी थीं, जिन्हें अमेरिका ने मानने से इनकार कर दिया।


ईरान की युद्धविराम की मांग

रविवार को, ईरान ने अमेरिका के सामने एक नया प्रस्ताव रखा, जिसमें सभी मोर्चों पर युद्धविराम लागू करने की मांग की गई थी। विशेष रूप से, लेबनान में संघर्ष को रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।


ईरान का कहना है कि युद्ध के दौरान उसे हुए नुकसान की भरपाई अमेरिका करे और मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही, अमेरिका को अपने सभी प्रतिबंध हटाने चाहिए ताकि ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की स्वतंत्रता मिल सके।


ट्रंप की प्रतिक्रिया

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि ईरान का यह प्रस्ताव उनके लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि तेहरान की शर्तें अमेरिका के रणनीतिक हितों के खिलाफ हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत का उद्देश्य केवल देश के अधिकारों की रक्षा करना है, न कि आत्मसमर्पण करना।


पाकिस्तान की मध्यस्थता

वॉशिंगटन और तेहरान के बीच वार्ता में पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है। मौजूदा हालात के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली जहाजरानी व्यवस्था प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है।


भारत और पाकिस्तान के बीच हुए पिछले संघर्ष 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि उन्हें ईरान का जवाब मिल गया है।


संघर्ष की पृष्ठभूमि

इससे पहले, ईरानी मीडिया ने दावा किया था कि तेहरान ने अमेरिकी प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया पाकिस्तान को सौंप दी थी, जिसे बाद में वॉशिंगटन भेजा गया। अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद यह संघर्ष शुरू हुआ था। हालांकि, आठ अप्रैल से युद्धविराम लागू है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है।