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अमेरिका-ईरान वार्ता का विफलता: शांति की उम्मीदें धूमिल

पश्चिम एशिया में शांति की संभावनाएं एक बार फिर धूमिल हो गईं हैं, जब अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की वार्ता बिना किसी परिणाम के समाप्त हो गई। ईरान ने वार्ता में भाग लेने के बावजूद वाशिंगटन की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से अपील की है कि वे मौजूदा संघर्ष-विराम का पालन करें। जानें इस वार्ता के विफल होने के पीछे के कारण और क्षेत्र में शांति की स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
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अमेरिका-ईरान वार्ता का विफलता: शांति की उम्मीदें धूमिल

शांति की कोशिशों को झटका

पश्चिम एशिया में शांति की संभावनाओं को एक बड़ा झटका तब लगा जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे की लंबी बातचीत बिना किसी परिणाम के समाप्त हो गई। यह पहल 40 दिनों के युद्ध और दो हफ्तों के संघर्ष-विराम के बाद शुरू हुई थी, लेकिन यह पूरी तरह से विफल रही।


प्रतिनिधिमंडलों की वापसी

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान पर आरोप लगाते हुए पाकिस्तान से रवाना होते ही ईरानी प्रतिनिधिमंडल भी स्वदेश लौट गया। इस प्रतिनिधिमंडल में ईरान के संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल थे। जेडी वेंस ने बताया कि ईरान ने वाशिंगटन की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया, जिसके कारण कोई समझौता नहीं हो सका।


ईरान का कूटनीतिक रुख

हालांकि वार्ता विफल रही, ईरान ने कूटनीति के दरवाजे बंद नहीं किए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि कूटनीति कभी समाप्त नहीं होती और यह राष्ट्रीय हितों की रक्षा का एक साधन है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान, पाकिस्तान और अन्य मित्र देशों के साथ बातचीत जारी रखेगा।


पाकिस्तान की चिंता

मेजबान देश पाकिस्तान ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने दोनों पक्षों से अपील की है कि भले ही बातचीत बेनतीजा रही हो, उन्हें मौजूदा संघर्ष-विराम समझौते का पालन करना चाहिए। पाकिस्तान ने क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए युद्धविराम के जारी रहने की आवश्यकता पर जोर दिया।