अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव: क्या पाकिस्तान करेगा मध्यस्थता?
अमेरिकी प्रशासन की कड़ी चेतावनी
नई दिल्ली: अमेरिकी सरकार ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब कोई बहाना नहीं चलेगा। व्हाइट हाउस के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हवाले से एक पोस्ट में कहा गया है कि यदि ईरान उचित समझौता नहीं करता है, तो अमेरिका कठोर कदम उठाने के लिए तैयार है।
पोस्ट में उल्लेख किया गया है, "हम एक उचित डील की पेशकश कर रहे हैं। यदि उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया, तो अमेरिका ईरान के सभी पावर प्लांट और पुलों को नष्ट कर देगा। अब नरमी नहीं बरती जाएगी।" यह संदेश ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच आया है और इसे एक अल्टीमेटम के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, यदि ईरान पीछे नहीं हटता है, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला है।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान की जवाबी चेतावनी
ईरान ने इस चेतावनी का जवाब देते हुए कहा है कि यदि अमेरिका कोई आक्रामक कदम उठाता है, तो वह मुंहतोड़ जवाब देगा। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों में वृद्धि हुई है, और यह माना जा रहा है कि मध्य पूर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में एक छोटी सी गलती भी युद्ध का कारण बन सकती है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें
पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें तेज
बातचीत में गतिरोध को देखते हुए, पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता कराने की कोशिशें तेज कर दी हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि हाल के दिनों में दोनों पक्षों से संपर्क बढ़ाया गया है। 22 अप्रैल को इस्लामाबाद में नई बातचीत की तैयारी चल रही है।
इस संदर्भ में, पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने अमेरिकी चार्ज डी अफेयर्स नैटली बेकर से मुलाकात की। इस बैठक में सुरक्षा व्यवस्था और दोनों देशों के बीच समन्वय पर चर्चा की गई। नकवी ने विदेशी मेहमानों को सुरक्षा देने का आश्वासन दिया।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का संवाद
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का फोन
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की। हालांकि, आधिकारिक बयान में बातचीत का सीधा उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन यह संपर्क ऐसे समय में हुआ जब पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान कर रहा है।
इस्लामाबाद में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। रेड जोन, संभावित वार्ता स्थल और आसपास की सड़कें बंद कर दी गई हैं। चेकपोस्ट बढ़ाए गए हैं और होटलों को प्रतिनिधिमंडलों के लिए आरक्षित रखा गया है।
