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अमेरिका का नया सुरक्षा कदम: होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की रक्षा के लिए नौसेना की तैनाती

अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए अपनी नौसेना की तैनाती की घोषणा की है। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बताया कि यह कदम ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच उठाया गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य की वैश्विक तेल आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका है, और ईरान की धमकियों के बीच यह सुरक्षा उपाय आवश्यक हो गया है। जानें इस स्थिति का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर क्या प्रभाव पड़ेगा और ईरान की प्रतिक्रिया क्या है।
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अमेरिका का नया सुरक्षा कदम: होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की रक्षा के लिए नौसेना की तैनाती

अमेरिका का सुरक्षा ऐलान


नई दिल्ली: ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्काई न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि अमेरिकी नौसेना जल्द ही इन जहाजों की सुरक्षा के लिए एस्कॉर्ट करेगी।


होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व का एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। ईरान द्वारा पर्सियन गल्फ में जहाजों पर हमलों के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई हैं।


इस स्थिति ने वैश्विक बाजारों में गिरावट का कारण बना है। हालांकि, विकसित देशों ने अपने रणनीतिक भंडार से बड़ी मात्रा में तेल छोड़ने की योजना बनाई है, जिसमें अमेरिका का योगदान भी शामिल है।


अमेरिकी नौसेना का एस्कॉर्ट योजना

स्कॉट बेसेंट ने कहा, "जैसे ही सैन्य रूप से संभव होगा, अमेरिकी नौसेना किसी अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के साथ मिलकर जहाजों को एस्कॉर्ट करेगी।" उन्होंने यह भी बताया कि अभी भी कुछ टैंकर इस मार्ग से गुजर रहे हैं, जिनमें ईरानी और चीनी झंडे वाले जहाज शामिल हैं।


यह दर्शाता है कि जलडमरूमध्य में अभी तक कोई माइन नहीं बिछाए गए हैं। बेसेंट का यह बयान ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां अमेरिका ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।


ईरान की कड़ी चेतावनी

ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका और इजरायल के खिलाफ दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने शहीदों का बदला लेने की बात कही और क्षेत्र में हमलों को जारी रखने का संकेत दिया। ईरान का यह रुख संघर्ष को और बढ़ा सकता है।


युद्ध का बढ़ता खर्च

बेसेंट ने साक्षात्कार में बताया कि ईरान के साथ युद्ध ने अमेरिका को अब तक लगभग 11 अरब डॉलर का खर्चा कराया है। इस दौरान, उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप का कॉल आया, जिससे बातचीत कुछ समय के लिए रुकी। यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए राहत ला सकता है, लेकिन ईरान के साथ सीधे टकराव का खतरा भी बढ़ा सकता है।