अमेरिका का वेनेजुएला पर हवाई हमला: क्या है असली वजह?
दुनिया की नजरें लातिन अमेरिका पर
नई दिल्ली: मध्य-पूर्व से ध्यान हटाकर अब लातिन अमेरिका पर वैश्विक ध्यान केंद्रित हो गया है। शनिवार की सुबह अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस सहित कई क्षेत्रों में तीव्र हवाई हमले किए, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। अमेरिकी विमानों ने कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे राजधानी में जोरदार धमाके गूंज उठे।
इन हमलों से पहले, पिछले 24 घंटों में वेनेजुएला के तटों के पास अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई थी। इसने एक पुरानी बहस को फिर से जन्म दिया है: क्या अमेरिका वास्तव में ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है, या उसकी असली नजर दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार पर है?
काराकस में हमलों का विवरण
स्थानीय समयानुसार रात करीब 2 बजे काराकस में कम से कम सात धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। वेनेजुएला सरकार के अनुसार, काराकस के अलावा मिरांडा, अरागुआ और ला गुएरा राज्यों में भी नागरिक और सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए। सरकारी बयान में आरोप लगाया गया कि इन हमलों का उद्देश्य देश के तेल और खनिज संसाधनों पर नियंत्रण पाना है।
राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने इसे बाहरी आक्रमण करार देते हुए आपात स्थिति की घोषणा की है, जिससे सरकार को नागरिक अधिकारों को निलंबित करने और सशस्त्र बलों की भूमिका बढ़ाने का अधिकार मिल जाता है। सरकार ने अपने समर्थकों से सड़कों पर उतरकर "साम्राज्यवादी हमले" के खिलाफ प्रदर्शन करने की अपील की है।
अमेरिका की चुप्पी और मीडिया की रिपोर्ट
इस घटनाक्रम पर वाइट हाउस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई दिन पहले ही हमलों की अनुमति दे दी थी, लेकिन अन्य सैन्य प्राथमिकताओं और खराब मौसम के कारण कार्रवाई में देरी हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह ट्रंप प्रशासन का वेनेजुएला के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा सैन्य कदम माना जा रहा है। हमलों से कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी संघीय उड्डयन प्रशासन (FAA) ने वेनेजुएला के हवाई क्षेत्र में अमेरिकी वाणिज्यिक और निजी विमानों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।
अमेरिका में विरोध की आवाजें
अमेरिका के भीतर भी इस सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। हवाई से डेमोक्रेटिक सीनेटर ब्रायन शाट्ज ने कहा कि वेनेजुएला में अमेरिका का कोई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हित नहीं है जो युद्ध को सही ठहराए। उन्होंने कहा, "हमें अब तक यह सीख लेना चाहिए था कि बिना सोचे-समझे किसी और मूर्खतापूर्ण सैन्य अभियान में नहीं कूदना चाहिए।"
शाट्ज ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी जनता को यह बताने की भी जरूरत नहीं समझ रहे कि असल में हो क्या रहा है।
क्षेत्रीय प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम पर क्षेत्रीय स्तर पर हलचल मच गई है। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "वेनेजुएला पर हमला किया गया है।"
उन्होंने बताया कि वेनेजुएला से सटे सीमावर्ती इलाकों में उनकी सरकार ने एक ऑपरेशनल प्लान सक्रिय कर दिया है। पेट्रो ने अमेरिकी राज्यों के संगठन (OAS) और संयुक्त राष्ट्र से आपात बैठक बुलाने की मांग भी की।
ऑपरेशन 'सदर्न स्पीयर' और ड्रोन हमले
ताजा हमलों से पहले ही अमेरिका ने कैरेबियन सागर में अपनी नौसेना की मौजूदगी बढ़ा दी थी। इसे आधिकारिक तौर पर 'ड्रग कार्टेल के खिलाफ अभियान' बताया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी बलों ने वेनेजुएला के कुछ संदिग्ध ठिकानों और समुद्री जहाजों पर ड्रोन हमले किए और कई तेल टैंकरों को जब्त किया।
अमेरिका का दावा है कि इन टैंकरों से होने वाली कमाई मादुरो सरकार को मजबूत कर रही थी, जबकि मादुरो सरकार ने इसे "अवैध आर्थिक युद्ध" करार दिया है।
अमेरिका की आधिकारिक दलील
अमेरिका का कहना है कि मादुरो सरकार ने वेनेजुएला को एक 'नार्को-स्टेट' बना दिया है, जहां सरकारी अधिकारी ड्रग कार्टेल्स के साथ मिलकर नशीले पदार्थों की तस्करी कर रहे हैं।
इसके अलावा, 2024 के विवादित चुनावों के बाद से अमेरिका मादुरो को वैध राष्ट्रपति मानने से इनकार करता रहा है और वहां लोकतंत्र बहाल करने की बात करता है।
अमेरिकी नजरिए से यह कार्रवाई तेल के लिए नहीं, बल्कि ड्रग्स और तानाशाही के खिलाफ है।
तेल का खेल
आलोचकों और भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रग्स सिर्फ एक बहाना है। असली वजह वेनेजुएला का तेल है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है, करीब 303 अरब बैरल, जो सऊदी अरब से भी ज्यादा है। हालांकि, प्रतिबंधों और आर्थिक संकट के चलते उत्पादन बेहद कम हो गया है।
इसके अलावा, वेनेजुएला का हेवी क्रूड अमेरिकी रिफाइनरियों के लिए बेहद अहम है। रूस और मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।
दुनिया के लिए खतरे की घंटी
यह संघर्ष सिर्फ अमेरिका और वेनेजुएला तक सीमित नहीं रहेगा। अगर हालात बिगड़े तो इसके असर पूरी दुनिया पर पड़ सकते हैं। तेल आपूर्ति बाधित होने पर कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ेगा, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं।
इसके साथ ही शरणार्थी संकट गहराने और रूस-चीन जैसे देशों की दखलअंदाजी से यह टकराव वैश्विक संघर्ष का रूप भी ले सकता है।
असली मकसद क्या?
इतिहास बताता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नैतिकता अक्सर हितों का आवरण होती है। इसमें शक नहीं कि वेनेजुएला में मादुरो का शासन विवादों में है और ड्रग्स की समस्या मौजूद है, लेकिन यह सवाल भी उतना ही अहम है—अगर वेनेजुएला के पास तेल का खजाना न होता, तो क्या अमेरिका इतनी बड़ी सैन्य ताकत वहां झोंकता?
