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अमेरिका ने चीन की रिफाइनरी और शिपिंग कंपनियों पर लगाए प्रतिबंध

अमेरिका ने चीन की एक बड़ी तेल रिफाइनरी और कई शिपिंग कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिन पर आरोप है कि वे ईरान का तेल ले जा रही थीं। यह कदम ट्रंप प्रशासन की ईरान के तेल निर्यात को रोकने की कोशिशों का हिस्सा है। प्रतिबंधों की सूची में हेंगली पेट्रोकेमिकल कंपनी शामिल है, जो चीन की सबसे बड़ी स्वतंत्र रिफाइनरियों में से एक है। अमेरिका का मानना है कि यह कार्रवाई ईरान के सैन्य फंडिंग को रोकने में मदद करेगी। जानें इस मुद्दे पर अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के बारे में।
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अमेरिका ने चीन की रिफाइनरी और शिपिंग कंपनियों पर लगाए प्रतिबंध

अमेरिका का नया कदम

अमेरिका ने चीन की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी और लगभग 40 शिपिंग कंपनियों तथा टैंकरों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन पर आरोप है कि ये ईरान का तेल परिवहन कर रहे थे। एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान के तेल निर्यात, जो उसकी आय का मुख्य स्रोत है, को बाधित करने के लिए ट्रंप प्रशासन की एक नई पहल है।


प्रतिबंधों का समय

ये प्रतिबंध राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आगामी मुलाकात से कुछ हफ्ते पहले लागू किए गए हैं। इसके साथ ही, अमेरिका ने फारस की खाड़ी में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी भौतिक नाकाबंदी की है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग है।


कौन सी रिफाइनरी प्रभावित हुई?

प्रतिबंधों की सूची में चीन की हेंगली पेट्रोकेमिकल कंपनी की दालियान बंदरगाह पर स्थित सुविधा शामिल है। यह चीन की सबसे बड़ी स्वतंत्र रिफाइनरियों में से एक मानी जाती है, जिसकी दैनिक तेल प्रोसेसिंग क्षमता लगभग 4 लाख बैरल है।


अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का आरोप

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का कहना है कि हेंगली ने 2023 से ईरानी कच्चा तेल खरीदा, जिससे ईरानी सेना को सैकड़ों मिलियन डॉलर की आय हुई। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई ईरान के सैन्य फंडिंग को रोकने के उद्देश्य से की गई है।


ईरान और अमेरिका के बीच तनाव

यह कदम ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया है। अमेरिका ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह से रोकने की कोशिश कर रहा है, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकाबंदी वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।


ट्रंप प्रशासन की रणनीति

ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान की आय को कम करके उसके परमाणु कार्यक्रम और आतंकवाद के समर्थन को रोका जा सकेगा। चीन, जो ईरान के तेल का एक बड़ा खरीदार है, इस मुद्दे पर अमेरिका से असहमत है। दोनों देशों के बीच पहले से ही जटिल संबंध हैं, और ट्रंप तथा शी जिनपिंग की मुलाकात इस मुद्दे के कारण और भी कठिनाई में पड़ सकती है।