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अमेरिका ने पाकिस्तान से अपने कदम पीछे खींचे, तालिबान के खतरे में वृद्धि

अमेरिका ने पाकिस्तान में अपने कंसोलेट को बंद करने का निर्णय लिया है, जिससे तालिबान का खतरा बढ़ सकता है। यह कदम पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि अमेरिका की मौजूदगी सुरक्षा कवच के रूप में कार्य कर रही थी। अब, जैसे-जैसे अमेरिका अपनी मौजूदगी कम कर रहा है, पाकिस्तान में अस्थिरता बढ़ने की संभावना है। इस बीच, अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। जानें इस स्थिति का क्या असर होगा।
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अमेरिका ने पाकिस्तान से अपने कदम पीछे खींचे, तालिबान के खतरे में वृद्धि

पाकिस्तान के लिए अमेरिका का बड़ा झटका

पाकिस्तान, जो अमेरिका की गोद में बैठकर भारत को चुनौती देने की कोशिश कर रहा था, अब एक नए संकट का सामना कर रहा है। अमेरिका ने पाकिस्तान को एक ऐसा झटका दिया है कि 25 करोड़ पाकिस्तानी नागरिकों में भय का माहौल है। दरअसल, अमेरिका ने पाकिस्तान को अकेला छोड़ने का निर्णय लिया है। तालिबान के हमलों की खबरों के बीच, अमेरिका ने पेशावर में अपने कंसोलेट को बंद करने का ऐलान किया है। यह कदम इस्लामाबाद से लेकर लाहौर तक हड़कंप मचा रहा है। अब पेशावर से जुड़े सभी राजनैतिक कार्य इस्लामाबाद से ही संचालित होंगे। यह केवल एक कंसोलेट का बंद होना नहीं है, बल्कि यह एक स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका अपनी मौजूदगी को पाकिस्तान में कम कर रहा है।


सुरक्षा पर प्रभाव

पेशावर एक महत्वपूर्ण शहर है, जो वर्षों से उग्रवाद और आतंकवाद का केंद्र रहा है। अमेरिका की मौजूदगी इस क्षेत्र के लिए सुरक्षा कवच के रूप में कार्य कर रही थी, लेकिन अब जैसे ही अमेरिका ने अपने कदम पीछे खींचे हैं, अफगानिस्तान से खतरा बढ़ने की संभावना है। तहरीक तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) जैसे आतंकी संगठन और अधिक सक्रिय हो सकते हैं। यह क्षेत्र पाकिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा प्रांत है और इसकी सीमा सीधे अफगानिस्तान से जुड़ी हुई है। यहां के पश्तून अफगानिस्तान के पश्तूनों से गहरे संबंध रखते हैं, जिससे अफगानिस्तान में तालिबान की मजबूती का सीधा असर इस क्षेत्र पर पड़ता है।


भारत की ओर अमेरिका का झुकाव

अमेरिका पाकिस्तान से दूरी बना रहा है, जबकि भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को पश्चिम बंगाल की जीत पर बधाई दी, जो एक स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्ते को और मजबूत करना चाहता है। आर्थिक स्तर पर भी अमेरिका भारत में 0.5 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश करने की योजना बना रहा है, जो भारत में नौकरियों का सृजन करेगा और सप्लाई चेन को मजबूत करेगा। इस प्रकार, पाकिस्तान अस्थिरता में फंसता जा रहा है, जबकि भारत एक वैश्विक साझेदार के रूप में उभर रहा है।