अमेरिका ने मध्य पूर्व में ड्रोन हमलों के खिलाफ नई रक्षा प्रणाली तैनात करने का निर्णय लिया
अमेरिका ने मध्य पूर्व में ईरान के ड्रोन हमलों के खतरे के मद्देनजर नई ड्रोन-रोधी प्रणाली, मेरोप्स, तैनात करने का निर्णय लिया है। यह प्रणाली दुश्मन के ड्रोन को पहचानकर उन्हें नष्ट करने के लिए विकसित की गई है। अमेरिका पहले से ही अन्य मिसाइल रक्षा तंत्र का उपयोग कर रहा है, लेकिन मेरोप्स प्रणाली की लागत पारंपरिक उपायों की तुलना में कम है। इस प्रणाली का परीक्षण यूरोप में किया गया था और अब इसे मध्य पूर्व में तैनात किया जाएगा। जानें इस प्रणाली के सामरिक निहितार्थ और आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका के बारे में।
| Mar 7, 2026, 13:02 IST
मध्य पूर्व में सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अमेरिका का नया कदम
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान के ड्रोन हमलों के खतरे के बीच, अमेरिका ने अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका जल्द ही मध्य पूर्व में एक नई ड्रोन-रोधी मिसाइल प्रणाली, जिसे मेरोप्स कहा जाता है, तैनात करने की योजना बना रहा है। यह प्रणाली विशेष रूप से दुश्मन के ड्रोन को पहचानकर उन्हें हवा में ही नष्ट करने के लिए विकसित की गई है।
ईरान के ड्रोन से बढ़ती सुरक्षा चुनौतियाँ
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान द्वारा उपयोग किए जा रहे शाहेद ड्रोन क्षेत्र में सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। अमेरिका पहले से ही पैट्रियट और थाड जैसे शक्तिशाली मिसाइल रक्षा तंत्र का उपयोग कर रहा है, जो ईरानी मिसाइलों को गिराने में मदद करते हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि मध्य पूर्व में प्रभावी ड्रोन-रोधी साधनों की कमी है, जिसे पूरा करने के लिए मेरोप्स प्रणाली को तैनात किया जा रहा है।
मेरोप्स प्रणाली की विशेषताएँ
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि मेरोप्स प्रणाली की एक खासियत यह है कि यह ड्रोन के खिलाफ ड्रोन का ही उपयोग करती है। यह इतनी छोटी है कि इसे मध्यम आकार के पिकअप ट्रक के पीछे भी लगाया जा सकता है। यह प्रणाली दुश्मन के ड्रोन की पहचान कर उन्हें नष्ट करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करती है, जिससे यह उपग्रह या इलेक्ट्रॉनिक संचार बाधित होने पर भी लक्ष्य तक पहुँच सकती है।
ईरान के ड्रोन के खिलाफ अमेरिका की प्रतिक्रिया
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान के शाहेद ड्रोन के खिलाफ अब तक की प्रतिक्रिया संतोषजनक नहीं रही है। ईरान द्वारा उपयोग किए जा रहे ड्रोन तकनीकी दृष्टि से साधारण हैं, लेकिन रूस ने यूक्रेन युद्ध में उन्हें लगातार अपडेट किया है। यूक्रेन युद्ध के अनुभव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सस्ते और बड़ी संख्या में छोड़े गए ड्रोन आधुनिक सैन्य शक्ति के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
आर्थिक दृष्टिकोण से ड्रोन-रोधी उपाय
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की गुप्तचर समिति के वरिष्ठ सदस्य जिम हाइम्स ने कहा कि अमेरिका मिसाइलों को गिराने में सक्षम है, लेकिन बड़ी संख्या में मौजूद ईरानी ड्रोन एक गंभीर समस्या हैं। उन्होंने बताया कि यह समस्या केवल तकनीकी नहीं, बल्कि आर्थिक भी है। महंगे रक्षा मिसाइलों से सस्ते ड्रोन को गिराना आर्थिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है।
मेरोप्स प्रणाली का विकास और परीक्षण
मेरोप्स प्रणाली को इस समस्या के समाधान के रूप में विकसित किया गया है। यह प्रणाली ड्रोन को पहचानकर उन पर हमला करने वाले छोटे ड्रोन भेजती है, जिसकी लागत पारंपरिक रक्षा मिसाइलों की तुलना में बहुत कम है। पिछले वर्ष, यूरोप में इस प्रणाली का परीक्षण किया गया था, जहां इसे पोलैंड और रोमानिया में तैनात किया गया था।
मध्य पूर्व में तैनाती की योजना
रक्षा अधिकारियों के अनुसार, मेरोप्स प्रणाली को मध्य पूर्व के कई स्थानों पर तैनात किया जाएगा, जिनमें ऐसे स्थान भी शामिल होंगे जहां अमेरिकी सैनिक सीधे मौजूद नहीं हैं। इस प्रणाली का निर्माण पेरिनियल आटोनोमी नामक कंपनी कर रही है, जिसे प्रौद्योगिकी क्षेत्र के प्रमुख उद्यमियों का समर्थन प्राप्त है।
यूक्रेन का अनुभव और पेंटागन की चिंताएँ
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि अमेरिका ने उनके देश से ईरान के शाहेद ड्रोन से निपटने के अनुभव साझा करने का अनुरोध किया है। पेंटागन के अधिकारियों ने भी स्वीकार किया है कि ईरान द्वारा छोड़े जा रहे ड्रोन के बड़े समूह को रोकना आसान नहीं है।
आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका
इस घटनाक्रम के व्यापक सामरिक निहितार्थ हैं, क्योंकि आधुनिक युद्ध में ड्रोन अब निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। सस्ते और बड़ी संख्या में छोड़े जाने वाले ड्रोन महंगी और जटिल सैन्य प्रणालियों को चुनौती दे सकते हैं। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष संघर्ष का दायरा बढ़ रहा है।
मेरोप्स प्रणाली का महत्व
मेरोप्स की तैनाती बदलते युद्ध स्वरूप को दर्शाती है। यह संकेत देती है कि भविष्य में आकाश में केवल मिसाइल ही नहीं, बल्कि ड्रोन के खिलाफ ड्रोन की लड़ाई भी आधुनिक युद्ध का सामान्य दृश्य बन सकती है।
