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अमेरिका ने रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर मेरिनेरा को किया जब्त

संयुक्त राज्य अमेरिका ने हाल ही में एक रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर, मेरिनेरा, को जब्त किया है, जो वेनेजुएला, ईरान और रूस से जुड़े शिपमेंट पर अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने का प्रयास कर रहा था। इस कार्रवाई के बाद रूस ने कड़ी आपत्ति जताई है, यह कहते हुए कि जहाज अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में था। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और रूस की प्रतिक्रिया।
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अमेरिका ने रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर मेरिनेरा को किया जब्त

संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा टैंकर की जब्ती

संयुक्त राज्य अमेरिका ने उत्तरी अटलांटिक में एक तेल टैंकर को जब्त किया है, जिसे अब मेरिनेरा के नाम से जाना जाता है। पहले इसे बेला 1 कहा जाता था, और यह वेनेजुएला, ईरान और रूस से संबंधित तेल शिपमेंट पर अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने का प्रयास कर रहा था। अमेरिकी सेना के अनुसार, इस जहाज को अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के कारण 'जब्त' किया गया। हालांकि, रूस ने सुरक्षा के लिए एक नौसैनिक पोत भेजा, लेकिन तटरक्षक बल ने लंबे पीछा करने के बाद टैंकर पर कार्रवाई की। यह माना जा रहा है कि यह हाल के वर्षों में अमेरिका द्वारा किसी रूसी ध्वज वाले जहाज की पहली जब्ती है। टैंकर ने ईरान से अपनी यात्रा शुरू की और नवंबर में ओमान की खाड़ी से रवाना हुआ। यह स्वेज नहर और जिब्राल्टर जलडमरूमध्य से होते हुए दिसंबर की शुरुआत में अटलांटिक महासागर में पहुंचा।


कैरिबियन में पहली मुठभेड़

21 दिसंबर को, अमेरिकी तटरक्षक बल ने कैरिबियन सागर में इस जहाज को रोका। उस समय, टैंकर अभी भी बेला 1 नाम से परिचित था। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि उनके पास जब्ती वारंट था क्योंकि जहाज वैध राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहरा रहा था। हालांकि, चालक दल ने तटरक्षक बल को जहाज पर चढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद जहाज अटलांटिक महासागर में चला गया और अमेरिकी सेना ने उसका पीछा जारी रखा।


झंडा बदलकर पहचान छिपाने का प्रयास

जैसे ही पीछा जारी रहा, चालक दल ने जहाज को अमेरिकी जब्ती से बचाने के लिए कदम उठाए। उन्होंने जहाज के बाहरी हिस्से पर एक रूसी ध्वज रंगा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, जहाज उस देश के संरक्षण में होते हैं जिसका ध्वज वे फहराते हैं। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि यह प्रयास विफल रहा क्योंकि जहाज पहले से ही वैध राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहरा रहा था। इसके तुरंत बाद, जहाज ने अपनी पहचान बदल ली और बेला 1 का नाम बदलकर मेरिनेरा रख दिया, जिसे रूस के आधिकारिक जहाजरानी रजिस्टर में शामिल किया गया।


रूस का राजनयिक दबाव

रूस ने अमेरिका से औपचारिक अनुरोध किया कि वह टैंकर का पीछा करना बंद करे। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुरोध नए साल की पूर्व संध्या पर अमेरिकी विदेश विभाग को भेजा गया था। इसके बावजूद, पीछा जारी रहा। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि टैंकर पर प्रतिबंधों का उल्लंघन करने और ईरानी तेल का परिवहन करने का आरोप है। जैसे ही वेनेजुएला पर अमेरिकी दबाव बढ़ा, जहाज ने अचानक अपना मार्ग बदल दिया। 15 दिसंबर को, यह कैरिबियन सागर के पास रुका और फिर यूरोप की ओर मुड़ गया।


रूस की प्रतिक्रिया

रूस, जो वेनेजुएला का पुराना सहयोगी है, इस कार्रवाई से नाराज है। रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर कड़ी आपत्ति जताई है, यह कहते हुए कि जहाज अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में था और रूसी ध्वज के साथ चल रहा था। रूस ने कहा कि उनका जहाज अमेरिकी तट से लगभग 4000 किलोमीटर दूर था, फिर भी अमेरिकी सेना उसका पीछा कर रही थी। उन्होंने इसे असंगत और उकसाने वाला कदम बताया है। रूस के सरकारी टीवी चैनल ने जहाज के अंदर से कुछ फुटेज भी जारी किए हैं, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे घने कोहरे के बीच एक अमेरिकी कोस्ट गार्ड का जहाज उनका पीछा कर रहा है।