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अमेरिका में ईरान के खिलाफ युद्ध के विरोध में विशाल रैलियां

अमेरिका में ईरान के साथ युद्ध की स्थिति को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। लाखों लोगों ने 'नो किंग्स' रैलियों में भाग लिया, जिसमें मिनेसोटा राज्य प्रमुख केंद्र बना। इस विरोध का विस्तार अन्य देशों में भी हो रहा है, जहां प्रदर्शनकारियों ने नस्लवाद और तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाई। जानें इस महत्वपूर्ण घटना के बारे में और अधिक जानकारी।
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अमेरिका में ईरान के खिलाफ युद्ध के विरोध में विशाल रैलियां

ट्रंप के युद्ध निर्णय पर बढ़ता विरोध

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के साथ संभावित युद्ध की स्थिति को लेकर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को अमेरिका और यूरोप के विभिन्न शहरों में 'नो किंग्स' नामक रैलियों का आयोजन किया गया, जिसमें लाखों लोगों ने सड़कों पर उतरकर ट्रंप प्रशासन के निर्णयों के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की।


मिनेसोटा में प्रदर्शन का केंद्र

मिनेसोटा राज्य इस विरोध प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र बन गया है। सेंट पॉल में स्थित मिनेसोटा कैपिटल के बाहर हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हुए। प्रदर्शन के दौरान कई लोगों ने उल्टे अमेरिकी झंडे पकड़े हुए थे, जिसे संकट का प्रतीक माना जाता है।


रैलियों में भागीदारी का आंकड़ा

आयोजकों का अनुमान है कि इस बार लगभग 90 लाख लोग इन रैलियों में शामिल हुए। जून में आयोजित रैलियों में 50 लाख और अक्टूबर में 70 लाख लोगों ने भाग लिया था। हालांकि, इस बार के सटीक आंकड़े अभी आना बाकी हैं, लेकिन अमेरिका के सभी 50 राज्यों में 3,100 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।


सरकार और विरोधियों की प्रतिक्रियाएं

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने इन रैलियों को वामपंथी संगठनों की साजिश करार दिया है। वहीं, नेशनल रिपब्लिकन कांग्रेसनल कमिटी (NRCC) ने भी इन प्रदर्शनों की आलोचना करते हुए इसे 'अमेरिका-विरोधी' बताया है, यह कहते हुए कि ये रैलियां हिंसक विचारधारा को बढ़ावा दे रही हैं।


वैश्विक स्तर पर विरोध प्रदर्शन

यह विरोध केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। ब्रिटेन, इटली और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी प्रदर्शनों की योजना बनाई गई है। जिन देशों में राजशाही है, वहां इन रैलियों को 'नो टाइरेंट्स' (कोई तानाशाह नहीं) नाम दिया गया है। रोम और लंदन में प्रदर्शनकारियों ने ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमलों का विरोध किया और नस्लवाद के खिलाफ नारे लगाए।