Newzfatafatlogo

अमेरिका में ट्रंप के टैरिफ वापस: क्या इससे भारत और अन्य देशों को मिलेगा लाभ?

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के बाद, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए अरबों डॉलर के टैरिफ को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस फैसले से न केवल अमेरिकी आयातकों को लाभ होगा, बल्कि भारत समेत कई देशों के व्यापार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। सरकार लगभग 3.3 लाख आयातकों को टैरिफ के रूप में वसूले गए 166 अरब डॉलर वापस करने की योजना बना रही है। जानें इस प्रक्रिया के बारे में और कैसे यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है।
 | 
अमेरिका में ट्रंप के टैरिफ वापस: क्या इससे भारत और अन्य देशों को मिलेगा लाभ?

अमेरिका की व्यापार नीति में बड़ा बदलाव


नई दिल्ली: अमेरिका की व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव की खबर आई है, जो वैश्विक व्यापारियों के लिए राहत का संकेत हो सकती है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के बाद, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए अरबों डॉलर के टैरिफ को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस निर्णय से न केवल अमेरिकी आयातकों को लाभ होगा, बल्कि भारत समेत कई अन्य देशों के व्यापार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। पिछले महीने, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की आर्थिक नीतियों में शामिल कई टैरिफ को असंवैधानिक घोषित किया था।


धनवापसी की प्रक्रिया का प्रारंभ

अदालत के इस निर्णय के बाद, उन सभी आयातकों को धन वापस करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिन्होंने इन टैरिफ का भुगतान किया था। अमेरिकी सीमा शुल्क एजेंसी के एक अधिकारी ने बताया कि धनवापसी की प्रक्रिया के लिए लगभग 45 दिनों में एक नई प्रणाली तैयार की जाएगी। इस प्रणाली के लागू होने के बाद, आयातकों को उनके द्वारा चुकाए गए टैरिफ की राशि ब्याज सहित वापस की जाएगी।


3.3 लाख आयातकों को राहत की उम्मीद

सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा विभाग के अधिकारी ब्रैंडन लार्ड ने जानकारी दी कि सरकार लगभग 3.3 लाख आयातकों को टैरिफ के रूप में वसूले गए करीब 166 अरब डॉलर वापस करने की योजना बना रही है। इसके लिए सरकारी वकील एक संघीय व्यापार न्यायाधीश के साथ मिलकर समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं। अदालत ने हाल ही में आदेश दिया था कि एजेंसी अपनी मौजूदा प्रक्रिया का उपयोग करते हुए जल्द से जल्द धनवापसी शुरू करे।


आसान प्रक्रिया के तहत धनवापसी

अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। आयातकों से केवल न्यूनतम जानकारी मांगी जाएगी और उन्हें अलग से अदालत में मुकदमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। आयातकों को केवल एक घोषणा पत्र दाखिल करना होगा, जिसमें टैरिफ भुगतान का विवरण देना होगा। जब यह जानकारी सत्यापित हो जाएगी, तब अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा विभाग धनवापसी की प्रक्रिया शुरू करेगा।


इलेक्ट्रॉनिक रिफंड प्रणाली में कम पंजीकरण

हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि अभी तक बहुत कम आयातकों ने इलेक्ट्रॉनिक रिफंड प्रणाली में पंजीकरण कराया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अवैध टैरिफ का भुगतान करने वाले 3,30,000 से अधिक आयातकों में से केवल 21,423 ने ही छह फरवरी से शुरू हुई इलेक्ट्रॉनिक रिफंड प्रणाली में पंजीकरण कराया है। सरकार का मानना है कि जैसे-जैसे प्रक्रिया स्पष्ट होगी, अधिक आयातक इस प्रणाली में शामिल होंगे और उन्हें जल्द ही उनकी राशि वापस मिल सकेगी।


भारत समेत कई देशों को लाभ की संभावना

टैरिफ हटने और धनवापसी की प्रक्रिया से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। भारत जैसे देशों के निर्यातकों के लिए यह खबर राहत भरी हो सकती है, क्योंकि इससे अमेरिका के साथ व्यापारिक माहौल और भी अनुकूल बनने की संभावना है।