अमेरिकी अदालत का बड़ा फैसला: आयातकों को लौटाए जाएंगे अरबों डॉलर के अवैध टैरिफ
अदालत का आदेश और सरकार की जिम्मेदारी
एक अमेरिकी व्यापार अदालत के न्यायाधीश ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह उन आयातकों को अरबों डॉलर की राशि लौटाने की प्रक्रिया शुरू करे, जिन्होंने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध घोषित किए गए टैरिफ का भुगतान किया था। इस आदेश के बाद, सरकार को इन शुल्कों की वापसी के लिए कदम उठाने होंगे।
अदालत ने क्या निर्देश दिए?
मैनहट्टन स्थित व्यापार अदालत के न्यायाधीश रिचर्ड ईटन ने सरकार को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि उन लाखों आयात खेपों की अंतिम लागत निर्धारित की जाए, जिन पर पहले टैरिफ लगाया गया था। अदालत ने यह भी कहा कि आयातकों को उनकी राशि ब्याज सहित वापस की जानी चाहिए।
जब अमेरिका में कोई वस्तु आयात की जाती है, तो आयातक प्रारंभ में अनुमानित शुल्क का भुगतान करता है। लगभग 314 दिनों के बाद, उस भुगतान की अंतिम गणना की जाती है, जिसे 'लिक्विडेशन' कहा जाता है। न्यायाधीश ईटन ने यूएस कस्टम्स ऐंड बॉर्डर प्रोटेक्शन को निर्देश दिया कि वह इन शिपमेंट्स की लागत बिना टैरिफ जोड़े अंतिम रूप दे, ताकि आयातकों को रिफंड मिल सके।
सीमा शुल्क विभाग की चुनौतियाँ
सुनवाई के दौरान, न्यायाधीश ने कहा कि सीमा शुल्क विभाग को इस प्रक्रिया का अनुभव है और उसे अपने सिस्टम को इस तरह व्यवस्थित करना चाहिए कि रिफंड आसानी से जारी किया जा सके। उन्होंने बताया कि एजेंसी नियमित रूप से ऐसे मामलों में धनवापसी करती है, जब आयातक अनुमानित शुल्क से अधिक भुगतान कर देते हैं।
हालांकि, सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा विभाग ने अदालत में कहा कि इतने बड़े पैमाने पर बिना टैरिफ के प्रविष्टियों को अंतिम रूप देना एक बहुत बड़ा कार्य है। इसके लिए उन्हें सात करोड़ से अधिक आयात प्रविष्टियों की मैन्युअल समीक्षा करनी पड़ सकती है। विभाग ने अदालत से यह भी कहा कि रिफंड प्रक्रिया तय करने के लिए उसे लगभग चार महीने का समय चाहिए।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत के आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि आयातकों को अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए अवैध शुल्क की वापसी का अधिकार मिल सकता है। हालांकि, सरकार इस आदेश की सीमा को चुनौती दे सकती है या प्रक्रिया को लागू करने के लिए अधिक समय मांग सकती है।
जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने इन विवादित टैरिफ के माध्यम से लगभग 130 अरब डॉलर से अधिक की राशि एकत्र की थी। ये शुल्क ट्रंप की व्यापार नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते थे। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें अवैध ठहराते हुए रिफंड का रास्ता खोल दिया, लेकिन भुगतान की प्रक्रिया के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए थे।
यह आदेश एटमस फिल्ट्रेशन टेक्नोलॉजीज द्वारा दायर एक मुकदमे के दौरान आया, जिसमें कंपनी ने दावा किया था कि उसने लगभग 11 मिलियन डॉलर अवैध टैरिफ के रूप में चुकाए थे। व्यापार अदालत में इस तरह के लगभग 2,000 मामले दायर किए जा चुके हैं। अनुमान है कि 3 लाख से अधिक आयातकों ने इन शुल्कों का भुगतान किया था, जिनमें बड़ी संख्या छोटे कारोबारियों की है। अब ये सभी आयातक उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार एक सरल और कम खर्चीली व्यवस्था के जरिए उन्हें उनकी रकम वापस करेगी।
