अमेरिकी सबमरीन द्वारा ईरानी वॉरशिप पर हमला: भारत की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र का विवाद
अमेरिकी हमले की घटना
4 मार्च को सुबह यह जानकारी मिली कि अमेरिका की एक सबमरीन ने ईरानी वॉरशिप आईआरआईएस डेना को भारत की सीमा कन्याकुमारी से लगभग 380 किमी दूर समुद्र में डुबो दिया। यह वॉरशिप भारत में आयोजित मिलन 2026 अभ्यास में भाग लेने आई थी और लौटते समय इस पर हमला किया गया। यह घटना श्रीलंका के तट से केवल 70 किमी दूर हुई, जिसके परिणामस्वरूप श्रीलंकाई नौसेना ने ईरानी नाविकों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। इस घटना के बाद भारत के इंटरनेट स्पेस में एक अभियान शुरू हुआ, जिसमें भारत को एक कमजोर और विलेन के रूप में पेश किया गया। यह बताया गया कि भारत ने अमेरिका को अपने जल क्षेत्र में ईरानी वॉरशिप पर हमला करने की अनुमति दी।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की पहली घटना
यह घटना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार है जब एक देश की वॉरशिप पर दूसरे देश की सबमरीन द्वारा हमला किया गया। ईरान इस समय अमेरिका और इजराइल के साथ आधिकारिक युद्ध में है। ईरान पूरे मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है, जबकि अमेरिका ईरान और उसके सहयोगियों पर हमले कर रहा है।
अमेरिकी हमले का स्थान
अमेरिका ने यह हमला श्रीलंका के विशेष आर्थिक क्षेत्र में किया। किसी देश के तट से 12 मील तक का क्षेत्र उसका टेरिटोरियल वॉटर होता है, जबकि 200 मील तक का क्षेत्र उसके ईईजेड में आता है। इस क्षेत्र में विदेशी वॉरशिप बिना किसी गतिविधि के गुजर सकती हैं। यह हमला श्रीलंकाई नौसेना की पोस्ट से 40 मील दूर हुआ, इसलिए यह श्रीलंका का टेरिटोरियल वॉटर नहीं है।
क्या भारत को ईरानी वॉरशिप की सुरक्षा करनी चाहिए थी?
यह समझना आवश्यक है कि इस घटना ने भारत को ईरानी वॉरशिप की सुरक्षा के लिए मजबूर नहीं किया। भारतीय महासागर का अर्थ समझना महत्वपूर्ण है। आज के समुद्री नियमों के अनुसार, इस क्षेत्र पर कई देशों का अधिकार है। ईरान की वॉरशिप भारत के विशाखापट्टनम में हुए मिलन 2026 का हिस्सा बनने आई थी, और जहां हमला हुआ, वह विशाखापट्टनम से 1200 किमी दूर है।
क्या भारत इसे रोक सकता था?
भारत हिंद महासागर को अपनी रणनीतिक आँगन मानता है, लेकिन यह वास्तव में अंतरराष्ट्रीय जल है। भारत को इस हमले की जानकारी नहीं हो सकती थी, क्योंकि सबमरीन की गतिविधियों को मॉनिटर करना कठिन होता है।
क्या भारत को जानकारी नहीं थी?
सबमरीन की विशेषता यह है कि इसे कोई मॉनिटर नहीं कर सकता। हिंद महासागर क्षेत्र में सूचना संलयन केंद्र मर्चेंट ट्रैफिक के लिए है, जो समुद्री डकैती, आतंकवाद और तस्करी को रोकने में मदद करता है। हर जहाज का एक पहचान नंबर होता है, लेकिन युद्ध की स्थिति में ट्रांसपोंडर बंद कर दिए जाते हैं।
