अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ट्रंप के टैरिफ पर लगी रोक, भारतीय निर्यातकों को मिलेगी राहत
नई दिल्ली में महत्वपूर्ण निर्णय
नई दिल्ली : अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों पर रोक लगाते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स के नेतृत्व में अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को 1977 के आईईईपीए कानून के तहत टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। यह निर्णय भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे टेक्सटाइल और फार्मास्युटिकल जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर लगे भारी शुल्क का बोझ कम होगा। अब भारतीय निर्यातक एक स्थिर और कम शुल्क वाले माहौल में व्यापार बढ़ा सकेंगे।
कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
अदालत ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति की उन शक्तियों को चुनौती दी है, जिनका उपयोग ट्रंप ने व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए किया था। आईईईपीए के तहत लगाए गए टैरिफ को अमान्य करते हुए, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि व्यापारिक नीतियों का निर्धारण विधायी प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए। हालांकि, स्टील और एल्यूमिनियम पर लगे पुराने टैरिफ अभी भी लागू रहेंगे, क्योंकि वे अलग कानूनों के अधीन हैं।
भारतीय निर्यातकों को राहत
भारत के लिए यह निर्णय एक संजीवनी के समान है। अप्रैल 2025 में लागू होने वाले 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ अब कानूनी रूप से अमान्य हो गए हैं। इससे भारतीय इंजीनियरिंग, फार्मा और कपड़ा उद्योग पर से वित्तीय बोझ कम होगा। फरवरी 2026 में हुए समझौते के बाद रूसी तेल पर लगी पेनल्टी पहले ही हटा दी गई थी। अब इस फैसले के बाद भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना आसान और किफायती हो जाएगा।
भारतीय कंपनियों के लिए रिफंड का अवसर
इस न्यायिक आदेश का एक बड़ा सकारात्मक पहलू यह है कि भारतीय कंपनियों ने पिछले महीनों में टैरिफ के रूप में जो अरबों डॉलर का भुगतान किया था, उसकी वापसी के लिए वे कानूनी रूप से दावा कर सकती हैं। यह न केवल कंपनियों की वित्तीय स्थिति को सुधारने में मदद करेगा, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताओं को भी नई गति देगा। नई दिल्ली को अब व्यापारिक मेज पर बेहतर शर्तों पर बातचीत का अवसर मिलेगा।
राष्ट्रपति की शक्तियों पर नियंत्रण
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति आपातकालीन शक्तियों का उपयोग मनमाने ढंग से व्यापारिक शुल्क लगाने के लिए नहीं कर सकते। इस फैसले ने राष्ट्रपति की व्यापार शक्तियों पर न्यायिक जांच का एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया है। ट्रंप प्रशासन को अब अपनी नीतियों के लिए कांग्रेस की भूमिका और अन्य वैकल्पिक कानूनों का सहारा लेना होगा, जिससे उन्हें राजनीतिक और कानूनी रूप से अधिक जवाबदेह होना पड़ेगा। इससे संरक्षणवादी नीतियों पर कुछ हद तक नियंत्रण लगेगा।
भविष्य के व्यापारिक समीकरण
हालांकि सभी टैरिफ पूरी तरह समाप्त नहीं होंगे, लेकिन अधिकांश सामानों पर अब पुराने और कम बेसलाइन टैरिफ लागू होंगे। स्टील और एल्यूमिनियम जैसे सेक्टर अभी भी प्रभावित रहेंगे, जो कुल द्विपक्षीय व्यापार का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा हैं। फिर भी, यह फैसला वैश्विक बाजार में स्थिरता लाने में सहायक होगा। भारतीय निर्यातकों के लिए यह एक सकारात्मक वातावरण तैयार करेगा, जिससे वे कम अनिश्चितता और स्थिरता के साथ अपने व्यापार को वैश्विक स्तर पर बढ़ा सकेंगे।
