अमेरिकी सेना प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज को अचानक रिटायरमेंट का आदेश, क्या है पीछे की कहानी?
नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बदलाव
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच, अमेरिकी सेना के प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज को तुरंत रिटायर होने का आदेश दिया गया है। यह निर्देश रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ द्वारा जारी किया गया है। पेंटागन ने पुष्टि की है कि जनरल जॉर्ज अब अपनी भूमिका में नहीं रहेंगे।
संभावित जमीनी कार्रवाई की तैयारी
यह निर्णय उस समय लिया गया है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ संभावित जमीनी कार्रवाई की योजना बना रहा है। मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती को बढ़ाया जा रहा है, और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही ईरान को कड़ी चेतावनी दी है।
ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर सवाल
रक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, पीट हेगसेथ एक ऐसे सेना प्रमुख की तलाश कर रहे हैं जो राष्ट्रपति ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर सके। जनरल जॉर्ज की प्रशासन की योजनाओं को लागू करने की क्षमता को लेकर कुछ चिंताएं थीं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उनके और प्रशासन के बीच कोई सीधा मतभेद था या नहीं। पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जनरल जॉर्ज के लंबे सेवा योगदान के लिए धन्यवाद दिया गया है, लेकिन नेतृत्व में बदलाव का समय आ गया था।
जनरल जॉर्ज का सैन्य अनुभव
जनरल रैंडी जॉर्ज एक अनुभवी इन्फैंट्री अधिकारी हैं, जिन्होंने वेस्ट पॉइंट मिलिट्री एकेडमी से स्नातक किया है। उन्होंने गल्फ वॉर, इराक और अफगानिस्तान में महत्वपूर्ण लड़ाइयों में भाग लिया है। 2021-22 के दौरान, वे बाइडेन प्रशासन में रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन के वरिष्ठ सैन्य सहायक के रूप में कार्यरत थे।
उन्हें 2023 में जो बाइडेन द्वारा अमेरिकी सेना का प्रमुख नियुक्त किया गया था, और सीनेट ने इसकी पुष्टि की थी। उनका सामान्य कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन अब उन्हें जल्दी रिटायर होना पड़ रहा है। ध्यान दें कि अमेरिकी सेना प्रमुख का सामान्य कार्यकाल चार साल का होता है।
संभावित उत्तराधिकारी की चर्चा
वर्तमान में, अमेरिकी सेना के उप प्रमुख जनरल क्रिस्टोफर लानेव को जनरल जॉर्ज का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है। लानेव 2022-23 के दौरान 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के कमांडिंग जनरल रह चुके हैं, जो पैराशूट हमलों में विशेषज्ञता के लिए प्रसिद्ध है। यह बदलाव पेंटागन में हो रहे बड़े नेतृत्व परिवर्तनों का हिस्सा है, और माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन अपनी रक्षा नीतियों को तेजी से लागू करने के लिए ऐसे कदम उठा रहा है।
