इंडोनेशिया के वित्त मंत्री का बयान: मलक्का स्ट्रेट पर टोल वसूली की योजना नहीं
इंडोनेशिया के वित्त मंत्री का स्पष्टीकरण
नई दिल्ली: ईरान से दूर एक अन्य इस्लामिक राष्ट्र, इंडोनेशिया के वित्त मंत्री पुरबाया युधी सदेवा के हालिया बयान ने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी थी। उन्होंने संकेत दिया था कि उनका देश मलक्का स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाकर राजस्व जुटा सकता है। इससे यह चिंता बढ़ गई थी कि होर्मुज स्ट्रेट के बाद अब मलक्का पर भी जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, अब इंडोनेशियाई मंत्री ने इस पर स्पष्टीकरण दिया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, शुक्रवार (24 अप्रैल 2026) को वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि मलक्का स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की कोई योजना नहीं है। इससे पहले गुरुवार को देश के विदेश मंत्री ने भी यही बात कही थी।
इंडोनेशिया का टोल वसूली पर रुख
इंडोनेशिया के वित्त मंत्री ने कहा था कि देश अपने नियंत्रण वाले स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाकर अच्छी कमाई कर सकता है। इस बयान के बाद कयास लगाए जाने लगे थे कि ईरान की तरह इंडोनेशिया भी मलक्का स्ट्रेट पर टोल वसूल सकता है। लेकिन अब उन्होंने दोहराया कि दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, इंडोनेशिया मलक्का स्ट्रेट में किसी प्रकार की ट्रांजिट फीस नहीं वसूलेगा।
उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इंडोनेशिया समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि का पालन करेगा, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय नौवहन के लिए जलमार्गों के नियम निर्धारित किए गए हैं। बुधवार (22 अप्रैल 2026) को पुरबाया ने स्ट्रेट को कमाई का साधन बताया था, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि ऐसा प्रबंध फिलहाल संभव नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति
मध्य पूर्व में होर्मुज स्ट्रेट के प्रभावी रूप से बंद होने के बाद एशियाई देशों में अन्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के जवाब में ईरान ने होर्मुज को लगभग बंद कर दिया है। अब वहां से कुछ जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दी जा रही है।
खबरों के अनुसार, ईरान जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने के बदले टोल वसूलने की योजना बना रहा है। होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित है और यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20% इसी मार्ग से गुजरता है। इसके बंद होने से खाड़ी देशों की तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है और ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं।
