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इजराइल के पूर्व खुफिया एजेंट का भारत के साथ सहयोग पर बड़ा खुलासा

इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के पूर्व एजेंट सागे वैसुलेन ने भारत के साथ इजराइल के गहरे संबंधों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि दोनों देश न केवल सुरक्षा के मामले में, बल्कि मूल्यों के स्तर पर भी एक-दूसरे के करीबी सहयोगी हैं। इसके अलावा, उन्होंने सूचना युद्ध के खतरे और 7 अक्टूबर को इजराइल पर हुए हमले के बारे में भी चर्चा की। जानें इस महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में और कैसे इजराइल भारत को खुफिया जानकारी प्रदान करता रहा है।
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इजराइल के पूर्व खुफिया एजेंट का भारत के साथ सहयोग पर बड़ा खुलासा

भारत और इजराइल का रणनीतिक संबंध

इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के पूर्व सदस्य सागे वैसुलेन ने भारत के साथ इजराइल के गहरे संबंधों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि दोनों देश न केवल सुरक्षा के मामले में, बल्कि मूल्यों के स्तर पर भी एक-दूसरे के करीबी सहयोगी हैं। वैसुलेन ने कहा कि इजराइल ने अतीत में कई बार भारत के साथ महत्वपूर्ण खुफिया जानकारियां साझा की हैं और भविष्य में भी किसी भी खतरे के संदर्भ में सहयोग जारी रहेगा। इसका मतलब है कि मोसाद समय-समय पर भारत की खुफिया एजेंसियों को महत्वपूर्ण सूचनाएं प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, को इजराइल एक मजबूत और विश्वसनीय सहयोगी मानता है। दोनों देश आतंकवाद और कट्टरपंथ जैसी चुनौतियों का मिलकर सामना कर रहे हैं। 


सूचना युद्ध का खतरा

पूर्व मोसाद एजेंट ने सूचना और प्रचार युद्ध के खतरे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह खतरा सीधे हथियारों से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और प्रचार के माध्यम से समाज को प्रभावित करता है। वैसुलेन ने बताया कि कट्टरपंथी इस्लामी समूह और अल्ट्रा लेफ्ट प्रोग्रेसिव नेटवर्क युवाओं को निशाना बना रहे हैं। यह खतरा अमेरिका, यूरोप, भारत और इजराइल में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत और इजराइल को इस मोर्चे पर मिलकर काम करने की आवश्यकता है, क्योंकि यह पारंपरिक युद्ध से कहीं अधिक जटिल है। सागे वैसुलेन ने इस तरह के प्रोपगेंडा और सूचना युद्ध से निपटने के लिए एक वैश्विक संगठन बनाने का सुझाव दिया, जिसकी शुरुआत इजराइल से होनी चाहिए और जिसमें बड़े देशों को शामिल होना चाहिए।


7 अक्टूबर के हमले पर चर्चा

इस दौरान, उन्होंने 7 अक्टूबर को इजराइल पर हुए हमले के बारे में भी बात की। उन्होंने इसे एक बड़ी खुफिया विफलता माना, लेकिन यह जानकारी की कमी नहीं थी, बल्कि खतरे का सही आकलन न कर पाने की गलती थी। उनके अनुसार, इजराइल का ध्यान मुख्य रूप से ईरान और अन्य मोर्चों पर था, जबकि गाजा और हमास से आने वाले खतरों को कम आंका गया। यही कारण था कि 7 अक्टूबर जैसी घटना हुई। कुल मिलाकर, मोसाद के पूर्व एजेंट ने भारत के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण खुलासे किए और बताया कि कैसे इजराइल समय-समय पर भारत को खुफिया जानकारी प्रदान करता रहा है और भविष्य में भी सहयोग जारी रखेगा।