Newzfatafatlogo

इजरायल की नई रणनीति: लेबनान में स्थायी नियंत्रण की तैयारी

मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता जा रहा है, जहां इजरायल ने लेबनान में स्थायी नियंत्रण की योजना बनाई है। रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने बताया कि सेना दक्षिणी लेबनान के एक बड़े हिस्से पर कब्जा करने की तैयारी कर रही है। इस योजना के तहत, विस्थापित लोगों की वापसी पर रोक लगाई गई है। हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का अभियान भी तेज हो गया है, जिसमें कई हमले किए गए हैं। जानें इस संघर्ष के पीछे की वजहें और इसके संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं।
 | 
इजरायल की नई रणनीति: लेबनान में स्थायी नियंत्रण की तैयारी

मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव


मध्य पूर्व में जारी तनाव अब एक नई और गंभीर दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान के साथ बढ़ते टकराव के बीच, इजरायल ने लेबनान के संदर्भ में एक नई रणनीति विकसित की है। हालिया संकेत बताते हैं कि इजरायल केवल जवाबी हमलों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि स्थायी नियंत्रण की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने स्पष्ट किया है कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान के एक बड़े हिस्से पर कब्जा करने की योजना बना रही है।


सुरक्षा क्षेत्र का निर्माण

इस योजना के तहत, इजरायल एक "सुरक्षा क्षेत्र" स्थापित करने का इरादा रखता है, जिससे वह अपनी सीमाओं को सुरक्षित रख सके। इस योजना में इजरायल अपनी सीमा से लेकर लितानी नदी तक के क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लेना चाहता है, जो लगभग 30 किलोमीटर की दूरी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कब्जे का दायरा कितना बड़ा हो सकता है।


विस्थापित लोगों की वापसी पर रोक

विस्थापित लोगों की वापसी पर रोक


इस योजना का एक विवादास्पद पहलू यह है कि इजरायल ने स्पष्ट किया है कि इस क्षेत्र से भागे हुए लगभग 6 लाख लोगों को फिलहाल वापस आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक इन लोगों की वापसी संभव नहीं होगी। इसके अलावा, सीमा के निकट स्थित कई घरों को भी गिराने की योजना बनाई गई है, ताकि सुरक्षा खतरे को कम किया जा सके।


हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का अभियान

हिजबुल्लाह के खिलाफ तेज हुआ अभियान


इजरायल पहले से ही हिजबुल्लाह के खिलाफ सक्रिय है, जो ईरान समर्थित एक संगठन है और लेबनान में इसका मजबूत प्रभाव है। हाल के दिनों में, इजरायल ने बेरूत और दक्षिणी लेबनान के कई हिस्सों पर लगातार हमले किए हैं, जिनमें अब तक 1200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।


इस संघर्ष की शुरुआत तब हुई जब अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु के बाद हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले शुरू किए। इसके जवाब में, इजरायल ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की और लेबनान को निशाना बनाया। इजरायल का मानना है कि हिजबुल्लाह, हमास और हूती जैसे संगठन उसके लिए गंभीर खतरा हैं, क्योंकि इन्हें ईरान का समर्थन प्राप्त है।


दोनों पक्षों को नुकसान

दोनों पक्षों को भारी नुकसान


इस संघर्ष में दोनों पक्षों को नुकसान उठाना पड़ा है। हिजबुल्लाह का दावा है कि उसने इजरायल के कई ठिकानों को निशाना बनाया है। वहीं, इजरायल के अनुसार, उस पर हजारों रॉकेट, ड्रोन और मोर्टार से हमले किए गए हैं। इन हमलों में इजरायल के कुछ सैनिक भी मारे गए हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है।