इजरायल के मोसाद प्रमुख का ईरान पर सख्त बयान: 'हमारा मिशन अभी अधूरा है'
इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: इजरायल और ईरान के बीच तनाव में वृद्धि के बीच, इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया ने एक बार फिर से कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ इजरायल का अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है और उनका लक्ष्य अभी भी अधूरा है।
बार्निया के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि उन्होंने ईरान के मौजूदा शासन को हटाने की बात की है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में हालिया सैन्य गतिविधियों के बाद स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है।
'मिशन अभी पूरा नहीं हुआ'
अपने संबोधन में मोसाद प्रमुख ने कहा, "हमारा मिशन अभी पूरा नहीं हुआ है। हमारा दायित्व तब तक पूरा नहीं होगा जब तक इस चरमपंथी शासन की जगह कोई और शासन नहीं आ जाता। यह शासन, जो हमारा विनाश चाहता है, उसे समाप्त होना चाहिए।"
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इजरायल को पहले से ही यह समझ था कि केवल सैन्य हमलों से ईरान के मौजूदा शासन को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।
इजरायल का गुप्त अभियान
हालांकि बार्निया ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मोसाद आगे किस प्रकार की रणनीति अपनाएगा, लेकिन यह ज्ञात है कि इजरायल लंबे समय से ईरान के भीतर गुप्त अभियानों को अंजाम देता रहा है।
मोसाद द्वारा 'शासन परिवर्तन' की बात करना असामान्य माना जा रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि इजरायल ईरान को अभी भी एक बड़ा खतरा मानता है।
सैन्य कार्रवाई और मौजूदा स्थिति
इससे पहले, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया था कि हालिया हवाई हमलों के माध्यम से ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े खतरों को काफी हद तक समाप्त कर दिया गया है।
फिर भी, मोसाद प्रमुख का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि इजरायल अभी भी स्थिति को पूरी तरह से नियंत्रित नहीं मान रहा है।
अंतरराष्ट्रीय तनाव में वृद्धि की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयान से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। दोनों देश फिलहाल संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने और स्थायी समाधान की दिशा में प्रयासरत हैं, लेकिन इस तरह के बयान से तनाव और बढ़ने की संभावना है।
पर्दे के पीछे की रणनीति
रिपोर्टों के अनुसार, जनवरी में व्हाइट हाउस में हुई एक बैठक में बार्निया ने सुझाव दिया था कि मोसाद ईरान के भीतर विपक्ष को सक्रिय करने, अशांति फैलाने और ऐसे कदम उठाने में सक्षम है, जिससे सरकार को कमजोर किया जा सके।
