इजरायल पर गंभीर आरोप: क्या सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया गया?
इजरायल पर नए आरोप
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच, इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इजरायली सेना ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले के दौरान सफेद फॉस्फोरस जैसे खतरनाक रासायनिक हथियारों का उपयोग किया है। इस आरोप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता को बढ़ा दिया है, क्योंकि ऐसे हथियारों का उपयोग जनसंख्या वाले क्षेत्रों में अत्यंत घातक माना जाता है।
हमले का विवरण
समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने बताया है कि इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के योहमोर गांव में सफेद फॉस्फोरस के गोले दागे। संगठन ने सात अलग-अलग तस्वीरों का विश्लेषण कर यह निष्कर्ष निकाला है कि यह हमला रिहायशी क्षेत्र में हुआ।
सूत्रों के अनुसार, इजरायली सेना ने पहले गांव के निवासियों को क्षेत्र खाली करने की चेतावनी दी थी, इसके बाद आर्टिलरी से हमला किया गया। हालांकि, मानवाधिकार संगठन यह स्पष्ट नहीं कर सका कि उस समय कितने लोग वहां मौजूद थे या किसी को नुकसान पहुंचा या नहीं।
सफेद फॉस्फोरस क्या है?
सफेद फॉस्फोरस एक अत्यंत खतरनाक रासायनिक पदार्थ है, जो आमतौर पर पीले या सफेद मोम जैसा दिखता है और इसमें लहसुन जैसी तेज गंध होती है। इसकी सबसे खतरनाक विशेषता यह है कि यह हवा में ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही जलने लगता है। जलने के दौरान इसका तापमान लगभग 815 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे यह किसी भी वस्तु या मानव शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
इंसानी स्वास्थ्य पर प्रभाव
जब सफेद फॉस्फोरस किसी व्यक्ति के शरीर पर गिरता है, तो यह त्वचा को गहराई तक जला देता है। कई मामलों में यह हड्डियों तक पहुंच जाता है, जिससे गहरे घाव बनते हैं। ऐसे घावों का इलाज करना बहुत कठिन होता है। इसके जलने से निकलने वाला धुआं भी अत्यंत खतरनाक होता है। यदि यह धुआं सांस के जरिए शरीर में चला जाए, तो यह फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और विवाद
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जनसंख्या वाले क्षेत्रों में सफेद फॉस्फोरस का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। इसका कारण यह है कि इससे आग तेजी से फैल सकती है और आम नागरिकों को भारी नुकसान हो सकता है। ह्यूमन राइट्स वॉच के लेबनान रिसर्चर रामजी कैस के अनुसार, रिहायशी इलाकों में इस तरह के हथियार का उपयोग चिंताजनक है और इसके गंभीर मानवीय परिणाम हो सकते हैं। हालांकि, इजरायली सेना का कहना है कि वह सफेद फॉस्फोरस का उपयोग आम लोगों को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि युद्ध के दौरान धुएं की आड़ बनाने के लिए करती है।
सैन्य उपयोग की प्रक्रिया
सफेद फॉस्फोरस आमतौर पर फॉस्फेट चट्टानों से तैयार किया जाता है। इसे सैन्य उपयोग के लिए गोले, बम या रॉकेट में भरा जाता है। जब यह जलता है, तो घना सफेद धुआं पैदा करता है। युद्ध के दौरान इसका उपयोग कई उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जैसे दुश्मन की नजर से बचने के लिए धुएं की परत बनाना, रात में युद्ध क्षेत्र को रोशन करना, और दुश्मन के उपकरण, वाहन या ठिकानों को जलाना। हालांकि, नागरिक क्षेत्रों में इसे आग लगाने वाले हथियार के रूप में इस्तेमाल करना अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत प्रतिबंधित है।
लेबनान में मानवीय संकट
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2 मार्च से 8 मार्च 2026 के बीच इजरायली हवाई हमलों में लगभग 400 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 83 बच्चे, 42 महिलाएं और 9 राहतकर्मी शामिल हैं। इसके अलावा, 1130 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें सैकड़ों बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं।
हमले मुख्य रूप से दक्षिणी लेबनान, बेकां घाटी और बेरूत के दक्षिणी इलाकों में किए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री राकान नासरेद्दीन ने इन घटनाओं को गंभीर मानवीय संकट बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है। लगातार हो रहे हमलों से आम नागरिकों की स्थिति बेहद कठिन होती जा रही है और क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है।
