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इजरायल-लेबनान संघर्ष: हालात गंभीर, मरने वालों की संख्या 2,020 तक पहुंची

इजरायल और लेबनान के बीच हालिया संघर्ष ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है, जिसमें मरने वालों की संख्या 2,020 तक पहुंच गई है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस युद्ध में महिलाओं, बच्चों और स्वास्थ्यकर्मियों की भी जानें गई हैं। संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद हुई, जिसके बाद हिजबुल्लाह ने जवाबी कार्रवाई की। ईरान ने भी लेबनान का समर्थन किया है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और क्या हो रहा है।
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इजरायल-लेबनान संघर्ष: हालात गंभीर, मरने वालों की संख्या 2,020 तक पहुंची

इजरायल और लेबनान के बीच बढ़ता तनाव

इजरायल और लेबनान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। लेबनान की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बिंत जबील शहर में हिजबुल्लाह के लड़ाकों और इजरायली सेना के बीच भयंकर संघर्ष चल रहा है। हालिया हमलों में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी इस संघर्ष में इजरायली हमलों के कारण लेबनान में मरने वालों की संख्या 2,020 हो गई है।


संघर्ष में हताहतों की संख्या

मंत्रालय के अनुसार, लगभग छह सप्ताह से चल रहे इस युद्ध में मरने वालों में 248 महिलाएं, 165 बच्चे और 85 स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। इसके अलावा, 6,436 लोग घायल हुए हैं, और पिछले 24 घंटों में लगभग 100 लोग मारे गए हैं। इस युद्ध ने लेबनान को काफी नुकसान पहुंचाया है।


संघर्ष की शुरुआत

इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष की जड़ें पुरानी हैं, लेकिन हालिया संघर्ष 28 फरवरी से शुरू हुआ। उस दिन अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त रूप से हमला किया। इसके तुरंत बाद, हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले तेज कर दिए। इसके जवाब में, इजरायल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए और जमीनी अभियान भी शुरू किया। इन हमलों के परिणामस्वरूप दोनों पक्षों को भारी नुकसान हुआ और क्षेत्र में तनाव बढ़ गया।


ईरान का समर्थन

ईरान समर्थित लेबनानी आतंकवादी समूह ने अमेरिका-इजरायल के हमलों के प्रतिशोध में 2 मार्च को इजरायल पर मिसाइलें दागीं। एक महीने से अधिक समय तक चले संघर्ष के बाद, पाकिस्तान की मध्यस्थता से युद्ध विराम पर सहमति बनी, हालांकि यह अस्थायी था। पाकिस्तान ने जानकारी दी थी कि इस युद्ध विराम में लेबनान शामिल नहीं है, लेकिन ईरान ने इसे खारिज कर दिया।


ईरान की प्रतिक्रिया

जब इजरायल ने लेबनान पर हमले जारी रखे, तो ईरान ने इसकी निंदा की और इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि लेबनान पर लगातार इजरायल के हमले युद्धविराम समझौते का गंभीर उल्लंघन हैं। इन हमलों के चलते बातचीत का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान अपने लेबनानी भाई-बहनों का समर्थन जारी रखेगा।