इज़राइल और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण वार्ता: नेतन्याहू और ट्रंप की बातचीत
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई। ट्रंप ने युद्ध विराम और कूटनीतिक समझौते की संभावनाओं पर जोर दिया, जबकि नेतन्याहू ने इज़राइल के हितों की रक्षा की बात की। ट्रंप ने ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत का दावा किया, जबकि ईरान ने इसे खारिज किया। जानें इस वार्ता के पीछे की सच्चाई और दोनों पक्षों के दृष्टिकोण।
| Mar 24, 2026, 10:36 IST
इज़राइल और अमेरिका के नेताओं के बीच बातचीत
पश्चिम एशिया में चल रहे गंभीर संघर्ष के बीच, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सोमवार को एक टेलीफोनिक वार्ता हुई। ट्रंप ने युद्ध विराम और कूटनीतिक समझौते की संभावनाओं पर जोर दिया, जबकि नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इज़राइल अपने परमाणु और मिसाइल विरोधी अभियानों को जारी रखेगा।
ट्रंप का सकारात्मक दृष्टिकोण
ट्रंप का दावा: "ईरान के साथ सार्थक बातचीत"
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हाल की बातचीत "उम्मीद से अधिक सकारात्मक" रही है।
ट्रंप ने अमेरिकी सेना को निर्देश दिया है कि अगले 5 दिनों तक ईरान के पावर प्लांट और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले टाल दिए जाएं।
ट्रंप का मानना है कि युद्ध के मैदान में मिली जीतों का उपयोग एक ऐसा समझौता करने के लिए किया जा सकता है जो मध्य-पूर्व में "पूर्ण शांति" लाए।
नेतन्याहू का स्पष्ट संदेश
नेतन्याहू का पलटवार: "हमारा हाथ अभी भी हमले के लिए तैयार"
ट्रंप से बातचीत के बाद, नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि समझौता तभी संभव है जब इज़राइल के "महत्वपूर्ण हितों" की रक्षा की जाएगी। बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, "हम ईरान और लेबनान में हमले जारी रखेंगे। हम उनके मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को नष्ट कर रहे हैं। हाल ही में हमने दो और परमाणु वैज्ञानिकों को मार गिराया है। हमारा हाथ अभी भी हमले के लिए पूरी तरह तैयार है।" नेतन्याहू ने हिज़्बुल्लाह को मिल रहे "कड़े झटकों" का भी उल्लेख किया और कहा कि इज़राइल अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।
ट्रंप की बातचीत का महत्व
ट्रंप का कहना है कि अमेरिका ने ईरान के साथ बातचीत की है।
ट्रंप ने पहले कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत हुई है और दोनों पक्षों के बीच "समझौते के महत्वपूर्ण बिंदु" थे। यह तब कहा गया जब उन्होंने अमेरिकी सेना को ईरान के पावर प्लांट और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले पांच दिनों के लिए टालने का आदेश दिया था।
हाल की बातचीत के बाद, ट्रंप ने अमेरिकी सेना को निर्देश दिया है कि वे अगले पांच दिनों तक तेहरान के पावर प्लांट और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने से बचें। 79 वर्षीय ट्रंप ने ईरान के साथ हुई बातचीत को "बहुत अच्छी" और "सार्थक" बताया। उन्होंने कहा कि इस बातचीत का मुख्य ध्यान मध्य-पूर्व में जारी टकराव का "पूर्ण और स्थायी" समाधान निकालने पर था।
ईरान का विरोध
हालांकि, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ ने ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया कि अमेरिका और ईरान मध्य-पूर्व के संघर्ष को समाप्त करने के लिए "सार्थक बातचीत" कर रहे हैं। उन्होंने अमेरिका पर तेल की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए बाजारों में हेरफेर करने का आरोप लगाया।
ग़ालिबफ़ का बयान
ग़ालिबफ़ ने सोमवार को कहा कि तेल और वित्तीय बाजारों में हेरफेर करने के लिए झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा उस "दलदल से बाहर निकलने" के लिए किया जा रहा है, जिसमें अमेरिका और इज़राइल इस समय फँसे हुए हैं।
उन्होंने कहा, "अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। झूठी खबरों का इस्तेमाल वित्तीय और तेल बाजारों में हेरफेर करने और उस दलदल से बाहर निकलने के लिए किया जा रहा है, जिसमें अमेरिका और इज़राइल फँसे हुए हैं।"
