इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी का अमेरिका को ग्रीनलैंड पर स्पष्ट संदेश
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्ज मेलोनी ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया है, जिसमें उन्होंने नाटो के भीतर सुरक्षा चिंताओं के समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। जापान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, उन्होंने अमेरिका द्वारा उठाए गए सुरक्षा सवालों को गंभीर बताया, लेकिन यह भी कहा कि इस पर चर्चा नाटो के ढांचे के तहत होनी चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने ग्रीनलैंड की सुरक्षा को सभी नाटो देशों की जिम्मेदारी बताया। अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते तनाव के बीच, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद दोनों के संबंधों को कैसे प्रभावित करेगा।
| Jan 18, 2026, 16:55 IST
मेलोनी का नाटो के भीतर सुरक्षा चिंताओं पर जोर
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्ज मेलोनी ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि आर्कटिक क्षेत्र से संबंधित सुरक्षा चिंताओं का समाधान नाटो के भीतर ही होना चाहिए। वर्तमान में, मेलोनी जापान के दौरे पर हैं, जहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने ग्रीनलैंड के बारे में अपने विचार साझा किए। उन्होंने अमेरिका द्वारा उठाए गए सुरक्षा सवालों को गंभीर और उचित बताया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि इस विषय पर चर्चा और निर्णय नाटो के ढांचे के तहत ही होना चाहिए। मेलोनी ने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा सभी नाटो देशों की साझा जिम्मेदारी है।
आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग की आवश्यकता
उन्होंने यह भी बताया कि आर्कटिक क्षेत्र में सहयोगी देशों की उपस्थिति को मजबूत करने पर विचार किया जाना चाहिए, लेकिन इसे आपसी मतभेदों के रूप में नहीं देखना चाहिए। मेलोनी ने कहा कि ग्रीनलैंड में किसी भी प्रकार के जमीनी सैन्य हस्तक्षेप की संभावना बहुत कम है। उनके अनुसार, यह एक राजनीतिक मुद्दा है और इसका समाधान राजनीतिक बातचीत के माध्यम से ही निकलेगा। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र केवल अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि पूरे यूरोप और अन्य देशों के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ता तनाव
आपको बता दें कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कहा कि 1 फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, फिनलैंड और ब्रिटेन से आयात होने वाले सामानों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। इसके बाद, 1 जून से यह टैरिफ बढ़ाकर 25% तक कर दिया जाएगा, और यह तब तक जारी रहेगा जब तक ग्रीनलैंड पर कोई समझौता नहीं होता। यूरोप के कई प्रमुख नेताओं ने ट्रंप के टैरिफ की धमकी को अस्वीकार किया है और कहा है कि यूरोप इसका सामूहिक जवाब देगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यह विवाद अमेरिका और यूरोप के संबंधों को कैसे प्रभावित करेगा।
