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इटली में फासीवादी तानाशाह मुसोलिनी का अंत: 28 अप्रैल का ऐतिहासिक दिन

28 अप्रैल 1945 को इटली में बेनिटो मुसोलिनी का अंत हुआ, जब विद्रोहियों ने उन्हें और उनके सहयोगियों को मार डाला। इस घटना ने फासीवाद के पतन का संकेत दिया और इटली में लोकतंत्र की बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। जानें इस ऐतिहासिक दिन के बारे में और मुसोलिनी के अंतिम क्षणों की कहानी।
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इटली में फासीवादी तानाशाह मुसोलिनी का अंत: 28 अप्रैल का ऐतिहासिक दिन

इटली का ऐतिहासिक दिन


इटली। 28 अप्रैल 1945 को इटली के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना घटी। इस दिन, इतालवी विद्रोहियों ने फासीवादी नेता बेनिटो मुसोलिनी को, जिसे इल ड्यूस के नाम से भी जाना जाता था, मार डाला। उनके साथ उनकी प्रेमिका क्लारा पेटाची और उनके 16 सहयोगियों को भी गोली मारी गई।


घटना का विवरण:


जब मुसोलिनी 27 अप्रैल को स्विट्जरलैंड की ओर भागने की कोशिश कर रहे थे, तब कोमो झील के पास डोंगो गांव में विद्रोहियों ने उन्हें पहचान लिया। 28 अप्रैल को, जूलिनो डि मेज़ेग्रा में उन्हें और उनके कुछ सहयोगियों को मृत्युदंड दिया गया। अगले दिन, मिलान में लोगों की भीड़ ने मुसोलिनी के शव को उसी स्थान पर लटका दिया, जहां उन्होंने 25 साल पहले फासीवादी आंदोलन की शुरुआत की थी। इस घटना के बाद, स्थानीय लोगों ने आजादी की खुशी मनाई।


इटली के प्रसिद्ध ऑटोमोबाइल और विमान इंजन डिजाइनर ऑरेलियो लैंप्रेडी के अनुसार, मुसोलिनी के अंतिम शब्द थे, 'मेरे दिल पर निशाना साधो'। फांसी के समय उन्होंने कुछ नहीं कहा। इतालवी मीडिया के अनुसार, मुसोलिनी का शव मिलान के पियाज़ा लोरेटो लाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग फासीवादी शासन के अंत पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे।


विशेषज्ञों का मानना है कि मुसोलिनी का पतन यूरोप में फासीवाद के अंत की एक महत्वपूर्ण घटना थी। इसने द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण में धुरी राष्ट्रों के मनोबल को गहरा आघात पहुंचाया और इटली में लोकतंत्र की बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। एक रिपोर्टर ने कहा था, 'आज की घटना केवल एक व्यक्ति का अंत नहीं है, बल्कि उस विचारधारा के पतन का भी संकेत है जिसने वर्षों तक इटली को नियंत्रित किया।'