इसराइल और अमेरिका की मुश्किलें: ट्रंप का आरोप और ईरान की स्थिति
इसराइल और अमेरिका की जटिल स्थिति
इसराइल और अमेरिका की स्थिति अब काफी कठिन हो गई है, जैसा कि मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है। राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नेतन्याहू अब किसी ऐसे सहारे की तलाश कर रहे हैं, जिस पर उन्होंने पहले भरोसा किया था। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि दोनों देश अब समझ नहीं पा रहे हैं कि आगे क्या करना है। ईरान की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है, और जंग का 25वां दिन चल रहा है।
इस बीच, ट्रंप ने अपने रक्षा सचिव पीट हेक्सेथ पर आरोप लगाना शुरू कर दिया है। एक कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हेक्सेथ ने उन्हें गुमराह किया और ईरान पर सैन्य कार्रवाई करने का सुझाव दिया। यह दर्शाता है कि ट्रंप अब अपनी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
ईरान के खिलाफ अमेरिका की रणनीति
ट्रंप की रणनीति अब विफल होती दिख रही है, जबकि ईरान ने अपनी स्थिति को मजबूत किया है। हेक्सेथ पर आरोप लगाते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान पर हमले का सुझाव दिया था। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इजराइल ने हमले की योजना बनाई थी, लेकिन अमेरिका ने हस्तक्षेप किया। यह स्पष्ट है कि ट्रंप को ईरान के खिलाफ क्या करना है, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है।
इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बर्निया से भी नेतन्याहू नाराज हैं। बर्निया ने ईरान पर हमले की योजना बनाई थी, जिसमें उम्मीद की गई थी कि इससे ईरान में विद्रोह होगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, और ईरान में कोई बड़ा आंदोलन नहीं हुआ।
ईरान में स्थिति
जनवरी 2026 में हुए महंगाई विरोधी आंदोलन के बाद अमेरिका और इजराइल ने सोचा था कि यह सही समय है, लेकिन यह उनके लिए गलत साबित हुआ। अब ईरान में कोई भी व्यक्ति सरकार के खिलाफ सड़कों पर नहीं आया है। जो लोग बाहर निकले हैं, वे इमाम आयतुल्लाह अली खामनेई के समर्थक हैं।
