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ईरान-अमेरिका के बीच संभावित समझौता: होर्मुज जलडमरूमध्य पर टोल वसूली पर नई जानकारी

ईरान और अमेरिका के बीच संभावित अंतरिम समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूली की अनुमति नहीं होगी। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह सीधे टोल टैक्स नहीं लेगा, बल्कि सुरक्षा और पर्यावरण सेवाओं के लिए शुल्क वसूलेगा। इस्माइल बगाई ने पश्चिमी मीडिया पर आरोप लगाया है कि वह जानबूझकर ईरान की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। जानें इस समझौते का वैश्विक तेल आपूर्ति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
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ईरान-अमेरिका के बीच संभावित समझौता: होर्मुज जलडमरूमध्य पर टोल वसूली पर नई जानकारी

नई दिल्ली में ईरान और अमेरिका के बीच समझौते की चर्चा


नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच एक संभावित अंतरिम समझौते के बारे में नई जानकारी सामने आई है। इस समझौते के अनुसार, ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, तेहरान ने स्पष्ट किया है कि वह सीधे तौर पर "टोल टैक्स" नहीं लेगा, बल्कि सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण सेवाओं के नाम पर शुल्क वसूलेगा।


इस्माइल बगाई का बयान

सोमवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि पश्चिमी मीडिया जानबूझकर "टोल टैक्स" जैसे शब्दों का उपयोग कर ईरान की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार, समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोला जाएगा, लेकिन जहाजों को सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सेवाओं के लिए भुगतान करना होगा।


उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा केवल ईरान की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की जिम्मेदारी है। इसी कारण, ईरान और ओमान मिलकर जल्द ही एक नया प्रोटोकॉल जारी करेंगे, जिसमें होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए नियम और शुल्क निर्धारित किए जाएंगे। ईरान का कहना है कि यह शुल्क जलमार्ग की सफाई और सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक होगा।


होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। यह मार्ग फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है, और यहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल की आपूर्ति होती है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और इराक जैसे देश इसी मार्ग से तेल और गैस का निर्यात करते हैं।


ईरान द्वारा सुरक्षा शुल्क की वसूली

यह ध्यान देने योग्य है कि फरवरी 2026 के बाद ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर सुरक्षा शुल्क लगाना शुरू किया था। रिपोर्टों के अनुसार, कई जहाजों से भारी रकम वसूली गई, जबकि भारत, चीन और पाकिस्तान के जहाजों को राहत दी गई थी। ईरान ने इसके लिए एक अलग प्रशासनिक ढांचे की भी घोषणा की थी, जिसकी निगरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा की जाएगी।


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच जिस अंतरिम परमाणु समझौते पर सहमति बनने की बात कही जा रही है, उसमें यह भी शामिल है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी बाधा के खुला रखेगा और परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। इसके बदले में अमेरिका की ओर से ईरान पर लगे कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और जब्त संपत्तियों को लौटाने की संभावना जताई जा रही है।