ईरान-अमेरिका डील पर अनिश्चितता: क्या होगी ट्रंप की रणनीति?
व्हाइट हाउस की नई स्थिति
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ईरान के साथ एक समझौता बहुत निकट है और इसके विवरण जल्द ही साझा किए जाएंगे। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस सकारात्मक बयान को कुछ हद तक कम कर दिया है।
ईरान की मंजूरी में देरी
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, ईरान के साथ डील को तेहरान की नेतृत्व, विशेषकर सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की स्वीकृति मिलने में कुछ समय लग सकता है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजश्कियान ने भी कहा है कि इस्लामिक रिपब्लिक में कोई निर्णय सुप्रीम लीडर की अनुमति के बिना नहीं लिया जाता।
समझौते के ब्योरे पर चर्चा
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि समझौते के विवरण अभी भी बातचीत के चरण में हैं। इसलिए, रविवार को किसी डील पर हस्ताक्षर होने की संभावना नहीं है। अधिकारी ने कहा कि दोनों देशों के बीच कुछ विशेष बिंदुओं पर बातचीत चल रही है। अमेरिका कुछ शब्दों पर जोर दे रहा है, जबकि ईरान के पास भी अपने मुद्दे हैं।
अधिकारी ने ईरान की निर्णय लेने की प्रक्रिया को 'धीमी और अस्पष्ट' बताया, जिससे बातचीत में और समय लग सकता है।
डील की स्थिति
एक्सियोस ने अधिकारी के हवाले से कहा, 'हमारी समझ है कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने डील के बड़े ढांचे को मंजूरी दे दी है, लेकिन क्या यह अंतिम समझौता बनेगा, यह अभी भी एक सवाल है।' दोनों पक्षों ने प्रगति की बात की है, लेकिन वे पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं।
ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने चेतावनी दी है कि अमेरिका की कुछ शर्तों के कारण डील बिगड़ सकती है। अमेरिकी अधिकारी भी मानते हैं कि डील अभी पूरी नहीं हुई है और यह टूट भी सकती है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने वार्ताकारों को जल्दबाजी न करने का निर्देश दिया है और दोनों पक्षों को सही निर्णय लेने के लिए समय लेना चाहिए।
परमाणु कार्यक्रम पर ध्यान
मुख्य मुद्दों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम शामिल है। अमेरिकी अधिकारी का कहना है कि तेहरान ने सिद्धांत रूप में हॉर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोलने और अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम के स्टॉक को निपटाने पर सहमति जताई है, लेकिन ईरान ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है।
तेहरान का कहना है कि इस चरण में परमाणु मुद्दा बातचीत का हिस्सा नहीं है। दोनों देश सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं, और यह स्पष्ट नहीं है कि डील कब और कितनी मजबूती से हो पाएगी।
