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ईरान-अमेरिका वार्ता में असफलता: ट्रंप के पास क्या हैं विकल्प?

इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता असफल रही है, जिससे ट्रंप के सामने कई विकल्प खड़े हो गए हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बिना किसी समझौते के लौटने के बाद, ईरान को अंतिम प्रस्ताव दिया है। यदि ईरान इसे ठुकराता है, तो ट्रंप के पास बमबारी या नौसैनिक घेराबंदी जैसे विकल्प हो सकते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी युद्धपोत फारस की खाड़ी में तैनात हैं, जिससे चीन और भारत पर भी दबाव बढ़ सकता है। जानें इस जटिल स्थिति के सभी पहलुओं के बारे में।
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ईरान-अमेरिका वार्ता में असफलता: ट्रंप के पास क्या हैं विकल्प?

ईरान-अमेरिका वार्ता का नतीजा


इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता पूरी तरह से असफल रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बिना किसी समझौते के पाकिस्तान से लौट आए हैं। 21 घंटे की बातचीत के बाद, वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने ईरान को अपना अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव पेश किया है, और अब निर्णय तेहरान को लेना है। वार्ता के विफल होने के बाद, यह सवाल उठता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास क्या विकल्प बचे हैं, खासकर जब दो हफ्ते का अस्थायी सीजफायर समाप्त हो रहा है। ट्रंप ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए ट्रुथ सोशल पर एक लेख साझा किया है।


ट्रंप के सामने दो प्रमुख विकल्प

ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ वेनेजुएला जैसी रणनीति अपनाने के संकेत दे रहा है। अमेरिका ने पहले निकोलस मादुरो की सरकार को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए घेराबंदी की थी। यदि ईरान ने शनिवार को दिए गए अंतिम प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, तो ट्रंप के पास दो विकल्प होंगे। पहला विकल्प है तेहरान पर भारी बमबारी करना, जैसा कि ट्रंप पहले ही वादा कर चुके हैं। दूसरा विकल्प है वेनेजुएला मॉडल को दोहराना, यानी नौसैनिक घेराबंदी के माध्यम से ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से ठप करना।


फारस की खाड़ी में अमेरिकी युद्धपोत की तैनाती

लेक्सिंगटन इंस्टीट्यूट की राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ रेबेका ग्रांट ने बताया कि अमेरिकी नौसेना के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में आने-जाने वाले जहाजों पर निगरानी रखना आसान है। पिछले 24 घंटों में 10 जहाज गुजरे हैं, जिनमें एक रूसी टैंकर भी शामिल है। चीन और भारत को ईरान से तेल मिल रहा है। यदि ईरान अपनी जिद पर अड़ा रहता है, तो अमेरिकी नौसेना खर्ग द्वीप और ओमान के पास संकरे रास्ते पर पूरी नजर रख सकती है। कोई भी जहाज अमेरिकी नौसेना की अनुमति के बिना नहीं गुजर सकेगा।


इससे चीन और भारत पर भी दबाव बढ़ेगा, क्योंकि दोनों देश ईरान से तेल का आयात करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि वेनेजुएला की घेराबंदी का नेतृत्व करने वाला विशाल युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड फोर्ड अब फारस की खाड़ी में तैनात है। कुछ दिन पहले आग लगने के कारण मरम्मत में लगा यह युद्धपोत अब यूएसएस अब्राहम लिंकन और अन्य बड़े युद्धपोतों के साथ मौजूद है।


खर्ग द्वीप पर ट्रंप का ध्यान

ट्रंप का मुख्य लक्ष्य ईरान को उसके परमाणु हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह से छोड़ने के लिए मजबूर करना है। जेडी वेंस ने कहा कि अभी तक ईरान से कोई सकारात्मक प्रतिबद्धता नहीं मिली है। रिटायर्ड जनरल जैक कीन ने सुझाव दिया कि यदि युद्ध फिर से शुरू होता है, तो ईरान के खर्ग द्वीप पर कब्जा किया जा सकता है या उसे नष्ट किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नौसेना घेराबंदी लगाकर ईरान की तेल निर्यात लाइन को बंद कर दिया जाए, तो उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ठप हो जाएगी, जो कि सबसे बड़ा दबाव होगा।