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ईरान-अमेरिका संघर्ष: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी सैन्य ठिकाने

मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों को तेज कर दिया है। हाल की सैटेलाइट तस्वीरों से अमेरिकी ठिकानों पर विमानों और मिसाइलों की संख्या में वृद्धि का पता चला है। कतर, जॉर्डन और सऊदी अरब में महत्वपूर्ण बदलाव देखे गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ परमाणु समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग को ठुकरा दिया है। इस लेख में हम इन सैन्य ठिकानों और उनके महत्व पर चर्चा करेंगे।
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ईरान-अमेरिका संघर्ष: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी सैन्य ठिकाने

संघर्ष की नई लहर


नई दिल्ली : मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में, चीन की सैटेलाइट तस्वीरों ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर विमानों और मिसाइलों की संख्या में वृद्धि को दर्शाया है। रिपोर्टों के अनुसार, कतर, जॉर्डन और सऊदी अरब में महत्वपूर्ण बदलाव देखे गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ परमाणु समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वे बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाने की भी मांग कर रहे हैं। ईरान ने इस मांग को ठुकरा दिया, जिसके बाद हमले शुरू हुए। बहरीन के नौसैनिक अड्डे को निशाना बनाया गया, जबकि पिछले वर्ष अमेरिका ने ईरान के परमाणु स्थलों पर भी हमला किया था।


सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा

प्लैनेट लैब्स द्वारा जनवरी और फरवरी 2026 के बीच जारी तस्वीरों में अमेरिकी ठिकानों पर महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई दिए। कतर के अल उदेद एयर बेस पर विमानों की संख्या में वृद्धि हुई है और पैट्रियट मिसाइल लॉन्चर तैनात किए गए हैं, जो ईरानी मिसाइलों से सुरक्षा प्रदान करेंगे। जॉर्डन के मुवाफक साल्टी एयर बेस पर एफ-15ई जेट्स, ए-10 विमान और एमक्यू-9 ड्रोन्स की तैनाती की गई है। सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर बड़े ट्रांसपोर्ट विमान देखे गए हैं। ओमान और डिएगो गार्सिया जैसे स्थानों पर भी सैन्य उपकरणों की संख्या बढ़ी है, जो अमेरिका की रक्षात्मक तैयारियों को दर्शाता है।


बहरीन में अमेरिकी नौसैनिक केंद्र

बहरीन में अमेरिकी नौसेना की पांचवीं फ्लीट का मुख्यालय स्थित है, जो खाड़ी, लाल सागर और अरब सागर की सुरक्षा का ध्यान रखता है। यह अड्डा समुद्री मार्गों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हाल के ईरानी हमलों ने इसे सीधे निशाने पर लिया है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा उत्पन्न हो गया है। यहां तैनात जहाज और कर्मी अमेरिकी हितों की रक्षा करते हैं, लेकिन बढ़ते तनाव ने चुनौतियों को बढ़ा दिया है।


कतर का प्रमुख सैन्य अड्डा

कतर की राजधानी दोहा के निकट रेगिस्तानी क्षेत्र में अल उदेद एयर बेस स्थित है, जो अमेरिकी सेंट्रल कमांड का मुख्यालय है। यह मिस्र से कजाकिस्तान तक के क्षेत्र में अभियानों का संचालन करता है। यहां लगभग 10,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। जनवरी में यहां एक नया समन्वय केंद्र खोला गया, जो वायु और मिसाइल रक्षा को मजबूत करेगा। सैटेलाइट तस्वीरों से यहां की बढ़ती गतिविधियों का स्पष्ट संकेत मिलता है।


कुवैत और UAE के ठिकानों पर हमला

कुवैत में कैंप अरिफजन अमेरिकी सेना का मुख्यालय है, जबकि अली अल सलेम एयर बेस इराक सीमा के निकट स्थित है। कैंप ब्यूहरिंग इराक युद्ध के दौरान स्थापित किया गया था, जो स्टेजिंग पॉइंट के रूप में कार्य करता है। यूएई में अल धफरा एयर बेस अमेरिकी वायु सेना का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जो आईएसआईएस के खिलाफ अभियानों में सक्रिय है। जेबेल अली पोर्ट नौसेना के जहाजों के लिए एक बड़ा बंदरगाह है, जहां नियमित रूप से जहाज आते हैं।


इराक, सऊदी अरब और अन्य देशों में बेस

इराक में एन अल असद एयर बेस इराकी बलों को सहयोग प्रदान करता है, जबकि एरबिल प्रशिक्षण का केंद्र है। 2020 में ईरान ने यहां हमला किया था। सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर पैट्रियट और थाड सिस्टम तैनात हैं। जॉर्डन के मुवाफक साल्टी एयर बेस में अमेरिकी विंग सक्रिय है। तुर्की के इंसिरलिक में परमाणु हथियार रखे गए हैं, जो गठबंधन अभियानों में सहायता करते हैं। ये सभी ठिकाने अमेरिकी रणनीति का हिस्सा हैं, लेकिन ईरानी खतरे के कारण दबाव में हैं।