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ईरान-इजराइल संघर्ष: क्या वैश्विक खाद्य संकट की ओर बढ़ रहा है विश्व?

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है। ईरान में युद्ध के कारण फर्टिलाइजर की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिससे खाद्य उत्पादन में कमी आ सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और यूरिया की बढ़ती कीमतें किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो विकासशील देशों को गंभीर खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है। जानें इस संकट के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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ईरान-इजराइल संघर्ष: क्या वैश्विक खाद्य संकट की ओर बढ़ रहा है विश्व?

वैश्विक खाद्य संकट का खतरा


नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने अब केवल क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित नहीं किया है, बल्कि यह वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर खतरा बन गया है। ईरान में युद्ध के कारण खाद की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव जल्द समाप्त नहीं होता है, तो दुनिया को गंभीर खाद्यान्न संकट का सामना करना पड़ सकता है। फर्टिलाइजर की कीमतों में वृद्धि और कच्चे माल की कमी कृषि उत्पादन को बाधित कर सकती है।


होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट

विश्व व्यापार का लगभग 25 से 35 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के संकरे मार्ग से होकर गुजरता है। वर्तमान में, ईरान के कारण यह जलमार्ग जहाजों के लिए लगभग बंद हो चुका है। इसी मार्ग से फर्टिलाइजर और उनके कच्चे माल की प्रमुख आपूर्ति होती है। जहाजों की आवाजाही रुकने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद बनाने वाले रसायनों की भारी कमी हो गई है। इस मार्ग की बंदी ने वैश्विक रसद तंत्र को हिलाकर रख दिया है।


ईरान का यूरिया निर्यात

ईरान विश्व के सबसे बड़े यूरिया निर्यातकों में से एक है। हाल की रिपोर्ट के अनुसार, रूस, मिस्र और सऊदी अरब के बाद ईरान वैश्विक यूरिया निर्यात में चौथे स्थान पर है। युद्ध के कारण ईरान का उत्पादन और निर्यात दोनों प्रभावित हुए हैं, जिसका सीधा असर सऊदी अरब के निर्यात पर भी पड़ रहा है। बाजार में यूरिया की कमी ने किसानों की चिंताएं वैश्विक स्तर पर बढ़ा दी हैं।


मिस्र में यूरिया की कीमतों में वृद्धि

खाद उद्योग से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि युद्ध शुरू होने के बाद से मिस्र में यूरिया की कीमतों में एक-तिहाई से अधिक की वृद्धि हुई है। केवल यूरिया ही नहीं, बल्कि सल्फर की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं। ज्ञात हो कि दुनिया के लगभग आधे सल्फर का निर्यात मध्य-पूर्व के देशों से होता है। वहां की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक खाद उत्पादन की लागत पर पड़ा है, जिससे कृषि क्षेत्र में अनिश्चितता पैदा हो गई है। यह स्थिति गंभीर है।


फर्टिलाइजर उद्योग की चुनौतियाँ

क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना और गैस उत्पादन संयंत्रों पर हो रहे हमलों ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है। प्राकृतिक गैस फर्टिलाइजर बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल है। गैस उत्पादन में आई गिरावट के कारण कई बड़े खाद उत्पादकों को अपना उत्पादन घटाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। ऊर्जा की कमी और कच्चे माल की कमी ने फर्टिलाइजर उद्योग को गंभीर संकट में डाल दिया है।


विकासशील देशों के लिए बढ़ती चुनौतियाँ

नार्वे की प्रसिद्ध रासायनिक कंपनी 'यारा इंटरनेशनल' ने चेतावनी दी है कि फर्टिलाइजर केवल एक साधारण वस्तु नहीं है, बल्कि यह दुनिया के आधे खाद्य उत्पादन का आधार है। यदि खाद की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो कृषि लागत में वृद्धि से अनाज की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी होगी। यह स्थिति विशेष रूप से विकासशील और गरीब देशों के लिए गंभीर हो सकती है, जहाँ की एक बड़ी आबादी पहले से ही कुपोषण और महंगाई का सामना कर रही है।