ईरान-इजराइल संघर्ष से वैश्विक तेल बाजार में हलचल
ईरान और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष ने 10 से अधिक देशों को प्रभावित किया है, जिसमें सऊदी अरब पर हमले के बाद वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच गई है। ईरान ने फारस की खाड़ी को बंद करने की घोषणा की है, जिससे भारत की तेल आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इस स्थिति में, रूस एक बार फिर भारत के लिए प्रमुख तेल सप्लायर बनने की संभावना रखता है। जानें इस जटिल स्थिति के पीछे की कहानी और इसके संभावित परिणाम।
| Mar 3, 2026, 16:29 IST
ईरान और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव
ईरान और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष ने 10 से अधिक देशों को प्रभावित किया है, जिनमें अधिकतर खाड़ी के मुस्लिम राष्ट्र शामिल हैं। पहले ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, क़तर और कुवैत पर हमले कर रहा था, लेकिन जब सऊदी अरब पर हमला हुआ, तो वैश्विक स्तर पर हड़कंप मच गया। हाल ही में सऊदी अरब की प्रमुख तेल कंपनी अरामको पर भी हमले की खबरें आई हैं। अरामको, जो दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी मानी जाती है, में आग लगने से रूस और भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है। ईरान का उद्देश्य है कि उसके खिलाफ हुए हमले का प्रभाव केवल कुछ देशों पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़े। इस संदर्भ में, ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स ने फारस की खाड़ी को पूरी तरह से बंद करने का निर्णय लिया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि कोई देश गैस और तेल व्यापार के लिए इस क्षेत्र का उपयोग करेगा, तो उसके जहाजों को नष्ट कर दिया जाएगा।
फारस की खाड़ी में संकट
वर्तमान में, फारस की खाड़ी के पास 700 से अधिक तेल टैंकर फंसे हुए हैं। क्रूड ऑयल की कीमतें अचानक 9.3% तक बढ़ गई हैं, जिससे यह पिछले 52 हफ्तों में सबसे महंगा हो गया है। भारत अपनी घरेलू तेल जरूरतों का 85% हिस्सा आयात करता है, जिसमें से लगभग आधा क्रूड ऑयल फारस की खाड़ी से आता है। लेकिन अब यह सब रुक जाएगा, क्योंकि फारस की खाड़ी बंद होने से सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात का तेल और गैस अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक नहीं पहुंच पाएगा। इस स्थिति में, रूस और भारत ने तेल व्यापार को फिर से बढ़ाने के संकेत दिए हैं। खबर है कि रूस ने इस मौके का लाभ उठाते हुए भारत से संपर्क किया है।
रूस का भारत के लिए संभावित तेल सप्लायर बनना
रूस एक बार फिर भारत के लिए सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन सकता है। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका भारत पर वेनेजुएला का तेल खरीदने का दबाव बना रहा था, लेकिन यह अभी तक संभव नहीं हो पाया है। हाल ही में, जब भारत ने रूस से तेल आयात को थोड़ा कम किया था, तब सऊदी अरब भारत के लिए सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया था। लेकिन अब ईरान के हमले के बाद, विशेषज्ञों का मानना है कि रूस एक बार फिर भारत के लिए सबसे बड़ा ऑयल सप्लायर बन सकता है।
