ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु तनाव: क्या है खामेनेई का नया निर्देश?
परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव एक बार फिर से बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने स्पष्ट रूप से कहा है कि देश में मौजूद समृद्ध यूरेनियम का भंडार किसी भी परिस्थिति में विदेश नहीं भेजा जाएगा। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ईरान पर शांति समझौते के तहत कई शर्तें लागू करने का प्रयास कर रहा है।
अमेरिका की मांगें
ईरान की अर्ध-सरकारी फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, अमेरिका ने तेहरान से मांग की है कि वह लगभग 400 किलोग्राम हथियार-योग्य समृद्ध यूरेनियम अंतरराष्ट्रीय निगरानी में सौंपे। इसके साथ ही, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को केवल एक स्थान तक सीमित रखे और यह भी स्वीकार करे कि युद्ध से हुए नुकसान के लिए वाशिंगटन किसी प्रकार का मुआवजा नहीं देगा।
ट्रंप की इन मांगों पर ईरानी नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सूत्रों ने बताया कि सर्वोच्च नेतृत्व का स्पष्ट मत है कि देश का परमाणु भंडार ईरान की सीमाओं से बाहर नहीं जाएगा। ईरान इसे अपनी सुरक्षा और रणनीतिक ताकत से संबंधित मुद्दा मानता है।
क्या ईरान ने अपना फैसला बदला?
कुछ समय पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान समृद्ध यूरेनियम सौंपने पर सहमत हो गया है और दोनों देशों के बीच समझौता निकट है। ट्रंप ने यह भी कहा था कि ईरान "परमाणु धूल" अमेरिका को लौटाने के लिए तैयार है। हालांकि, अब ईरान के ताजा रुख ने इन दावों को संदेह में डाल दिया है।
इजरायली प्रधानमंत्री की चिंता
इस बीच, इजराइल भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी चिंताओं को व्यक्त कर रहा है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में कहा कि जब तक ईरान से समृद्ध यूरेनियम पूरी तरह से हटा नहीं लिया जाता, तब तक क्षेत्र में शांति की संभावना नहीं है।
युद्धविराम के बावजूद, मध्य पूर्व में तनाव कम होता नहीं दिख रहा है। ईरान समर्थित गुटों और इजराइल के बीच टकराव जारी है। ईरानी अधिकारियों को आशंका है कि अमेरिका भविष्य में फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है, इसलिए तेहरान अब किसी भी समझौते में अपने रणनीतिक हितों से समझौता करने के मूड में नहीं है।
