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ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत: क्या तनाव कम होगा इस्लामाबाद में?

ईरान के सुप्रीम लीडर ने अमेरिका के साथ तनाव कम करने के लिए इस्लामाबाद में वार्ता की मंजूरी दी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस इस वार्ता में भाग लेंगे। यह निर्णय 22 अप्रैल 2026 को समाप्त होने वाले सीजफायर से पहले लिया गया है। क्या ट्रंप की धमकियों का असर है? पाकिस्तान ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। जानें, क्या यह वार्ता तनाव को कम कर पाएगी?
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ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत: क्या तनाव कम होगा इस्लामाबाद में?

ईरान के सुप्रीम लीडर ने दी वार्ता की मंजूरी


नई दिल्ली: ईरान के सर्वोच्च नेता ने अमेरिका के साथ तनाव को कम करने के लिए इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता को हरी झंडी दे दी है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल जल्द ही पाकिस्तान की राजधानी में पहुंचेगा। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस इस वार्ता में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह निर्णय 22 अप्रैल 2026 को समाप्त होने वाले सीजफायर की समयसीमा से पहले लिया गया है।


सकारात्मक माहौल का निर्माण

एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी टीम पिछले कुछ दिनों से तेहरान से अंतिम स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रही थी। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के भीतर से दबाव था कि जब तक अमेरिकी प्रतिबंध नहीं हटते, तब तक बातचीत नहीं होनी चाहिए। लेकिन पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र की कूटनीतिक कोशिशों के बाद ईरान ने वार्ता में भाग लेने का निर्णय लिया।


क्या ट्रंप की धमकियों का असर है?

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो वे ईरान के बुनियादी ढांचे, जैसे पुलों और बिजली घरों पर फिर से बमबारी कर सकते हैं।


अमेरिका को उम्मीद है कि यदि वार्ता में कोई ठोस प्रगति होती है, तो 22 अप्रैल की समयसीमा को बढ़ाया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने सोमवार (20 अप्रैल 2026) को ज्यादातर समय तेहरान की हां का इंतजार करते हुए बिताया। लेकिन अब यह वार्ता फिर से शुरू हो रही है।


पाकिस्तान पर सुरक्षा का दबाव

इस्लामाबाद ने वार्ता के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ईरानी राजदूत रज़ा अमीरी मोघद्दाम को बताया कि दूसरे दौर की वार्ता के लिए सभी तैयारियां पूरी हैं और प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।


पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस्लामाबाद और रावलपिंडी में लगभग 20,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं, जिनमें स्पेशल कमांडो, स्नाइपर्स, डॉल्फिन फोर्स, पंजाब हाईवे पेट्रोल और क्विक रिस्पॉन्स टीमें शामिल हैं। सेफ सिटी कैमरों और छतों से 24 घंटे निगरानी की जा रही है।


हालांकि, इतने कम समय में किसी बड़े समझौते की संभावना कम मानी जा रही है। फिर भी, दोनों पक्षों का आमने-सामने बैठना तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या इस्लामाबाद की यह बैठक सीजफायर को आगे बढ़ा पाएगी या नहीं?