ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में रुकावट: इजरायल के हमलों का असर
नई दिल्ली में कूटनीतिक गतिरोध
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक वार्ता एक बार फिर ठप हो गई है। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक इजरायल लेबनान और गाजा में अपनी सैन्य गतिविधियाँ समाप्त नहीं करता, तब तक वाशिंगटन के साथ कोई बातचीत नहीं होगी। ईरान ने मध्यस्थों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान भी फिलहाल रोक दिया है।
बातचीत का निलंबन क्यों?
ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, इजरायल के लेबनान पर हमले लगातार जारी हैं। पहले युद्धविराम की शर्तों में लेबनान भी शामिल था, लेकिन अब सभी मोर्चों पर इसका उल्लंघन हो रहा है। इसी कारण ईरानी वार्ता टीम ने मध्यस्थों के माध्यम से हो रही बातचीत को निलंबित कर दिया है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रतिरोध मोर्चा और ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य समेत अन्य मोर्चों को सक्रिय करने की योजना बनाई जा रही है। ये दोनों समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग हैं।
ईरान का कड़ा रुख
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम पूरे क्षेत्र में लागू होना चाहिए, जिसमें लेबनान भी शामिल है। उन्होंने X पर लिखा कि यदि एक मोर्चे पर उल्लंघन होता है, तो इसे पूरे युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा। अराघची ने चेतावनी दी कि किसी भी उल्लंघन के परिणामों के लिए अमेरिका और इजरायल जिम्मेदार होंगे।
लेबनान में इजरायल के हमले बढ़े
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर नए हमलों का आदेश दिया है। यह क्षेत्र हिज्बुल्लाह का गढ़ माना जाता है। इजरायल ने दाहियेह क्षेत्र को खाली करने की चेतावनी दी है, जिसके बाद परिवार वहां से निकलने लगे हैं। संघर्ष के आरंभ से अब तक लेबनान में दस लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं।
नेतन्याहू ने कहा कि हिज्बुल्लाह हमारे शहरों पर हमला करे और उसका मुख्यालय सुरक्षित रहे, ऐसा नहीं हो सकता। इजरायल ने सीमा पर सुरक्षा क्षेत्र स्थापित किया है और दक्षिणी लेबनान में जमीनी अभियान को बढ़ा दिया है। 16 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद से बेरूत में सीमित हमले हुए हैं, लेकिन दक्षिणी लेबनान में लड़ाई जारी है।
गाजा में स्थिति गंभीर
गाजा में भी युद्धविराम की स्थिति नाजुक बनी हुई है। अक्टूबर में ट्रंप की मध्यस्थता से हुआ सीजफायर इजरायल के सैन्य अभियानों को रोकने में असफल रहा है। इजरायल और हमास के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत चल रही है, जिसमें मुख्य मुद्दे हमास का निरस्त्रीकरण और गाजा से इजरायली सैनिकों की वापसी हैं। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, युद्धविराम के बाद भी इजरायली हमलों में लगभग 900 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। इन आंकड़ों में आम नागरिकों और लड़ाकों के बीच कोई भेद नहीं किया गया है।
