ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की संभावनाएं: पाकिस्तान की मध्यस्थता में नई हलचल
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच संभावित युद्धविराम पर चर्चा
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच संभावित युद्धविराम पर नई गतिविधियाँ देखने को मिल रही हैं। पाकिस्तान द्वारा प्रस्तुत सीजफायर प्रस्ताव पर ईरान विचार कर रहा है, लेकिन समझौते के महत्वपूर्ण बिंदु पर अभी भी गतिरोध बना हुआ है।
ईरान की शर्तें और सीजफायर पर विचार
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के बदले किसी अस्थायी युद्धविराम के लिए सहमत नहीं होगा। यह मुद्दा संभावित समझौते में सबसे बड़ी बाधा बनता दिख रहा है।
ईरानी अधिकारियों ने बताया कि उन्हें पाकिस्तान से युद्धविराम का प्रस्ताव मिला है, जिस पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, तेहरान ने कहा है कि अस्थायी सीजफायर के बदले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए वह तैयार नहीं है।
ईरान का स्पष्ट रुख
ईरानी अधिकारियों ने यह भी कहा कि तेहरान पर किसी भी प्रकार का दबाव डालकर युद्धविराम नहीं कराया जा सकता। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से डोनाल्ड ट्रंप के अल्टीमेटम का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी रणनीति सफल नहीं होगी।
ईरान का स्पष्ट रुख है कि वह किसी बाहरी दबाव में आकर निर्णय नहीं लेगा।
अमेरिका की मंशा पर संदेह
ईरान ने यह भी व्यक्त किया है कि उसे लगता है कि अमेरिका स्थायी युद्धविराम को लेकर गंभीर नहीं है। इसी कारण वह अस्थायी समझौते के तहत कोई बड़ा कदम उठाने के लिए तैयार नहीं है।
यह बयान दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को भी दर्शाता है।
युद्धविराम का प्रस्ताव दो चरणों में
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में दो चरणों में युद्धविराम लागू करने की योजना है। पहले चरण में दोनों पक्ष तुरंत सीजफायर की घोषणा करेंगे और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोल दिया जाएगा।
इसके बाद 15 से 20 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की बात कही गई है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति वैंस, दूत विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अराघची के साथ बातचीत की है, ताकि युद्धविराम की दिशा में प्रगति हो सके।
संभावित समझौते के मुद्दे
यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो इसमें ईरान द्वारा परमाणु हथियार कार्यक्रम को छोड़ने, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में राहत और जब्त की गई संपत्तियों की वापसी जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं।
हालांकि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बनी असहमति इस संभावित समझौते की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
